नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) मई के मध्य में एक सप्ताह के यूरोपीय दौरे पर जाने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ भारत के व्यापारिक, रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती देना है। अपने इस दौरे में पीएम मोदी नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली का दौरा करेंगे और कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे।
ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भागीदारी
दौरे का पहला प्रमुख पड़ाव नॉर्वे (Narve) की राजधानी ओस्लो होगा, जहां पीएम मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी भाग लेंगे। इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हो चुका है।
ईएफटीए समझौते से बढ़ी दौरे की अहमियत
नॉर्वे यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) का प्रमुख सदस्य है। अक्टूबर 2025 में लागू भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते के बाद इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है। इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है, जिससे करीब 10 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।
हरित ऊर्जा और नवाचार पर होगी चर्चा
ओस्लो में द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, ब्लू इकॉनमी, डिजिटलीकरण, इनोवेशन और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
नीदरलैंड के साथ संबंधों को नई गति
ओस्लो के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड का दौरा करेंगे। द हेग भारत का जल प्रबंधन, कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी सहयोग में एक अहम साझेदार रहा है। इस यात्रा के दौरान लंबित कार्यक्रमों और समझौतों को अंतिम रूप देने की संभावना है।
इटली दौरा और उच्चस्तरीय वार्ता
पीएम मोदी का इटली दौरा उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। यहां वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वेटिकन सिटी जाकर पोप से मुलाकात की भी संभावना जताई जा रही है।
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जून में जी7 शिखर सम्मेलन में भागीदारी
यूरोप के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के तहत पीएम मोदी जून में फ्रांस भी जाएंगे, जहां वे जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत को 2019 से लगातार इस समूह के आउटरीच कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
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