India energy crisis : ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका को गहरा दिया है। जहां कई देश पेट्रोल की राशनिंग और सख्त प्रतिबंध लागू कर रहे हैं, वहीं भारत अपनी रणनीतिक योजना के कारण इस संकट से सुरक्षित है। पिछले एक दशक में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए, वे आज एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं।
बहुआयामी रणनीति और वैकल्पिक मार्ग
भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि रूस, वेनेजुएला और अमेरिका सहित 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद, भारत ने ओमान और यूएई के वैकल्पिक बंदरगाहों का उपयोग कर आपूर्ति जारी रखी है। वर्तमान में भारत के पास लगभग 74 दिनों की जरूरतों के लिए रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने में सक्षम है।
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बचत उपाय और सरकारी पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा संरक्षण के लिए नागरिकों से वर्क फ्रॉम होम और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की (India energy crisis) अपील की है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि युद्ध का प्रभाव किसानों और छोटे व्यापारियों पर न पड़े, इसके लिए उर्वरक भंडार और एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाएं तैयार की गई हैं। दुनिया भर में ईंधन की कमी के बावजूद, भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता और संतुलित विदेश नीति के कारण स्थिति को नियंत्रण में रखने में सफल रहा है।
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