नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चुनाव परिणामों के बाद से ही चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है और (AIADMK) में विभाजन की स्थिति बन गई है। पार्टी के भीतर दो अलग-अलग गुट उभरकर सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
सीवी शनमुगम गुट ने टीवीके को दिया समर्थन
AIADMK के एक गुट, जिसका नेतृत्व विधायक (C. V. Shanmugam) कर रहे हैं, ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए (Tamilaga Vettri Kazhagam) के समर्थन का ऐलान कर दिया है। शनमुगम ने कहा कि पार्टी की स्थापना का उद्देश्य डीएमके का विरोध था और 53 वर्षों तक AIADMK ने इसी विचारधारा पर राजनीति की है। ऐसे में डीएमके के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा के खिलाफ होगा।
संगठनात्मक ढांचे में बदलाव का ऐलान
शनमुगम गुट ने पार्टी संगठन में भी बदलाव की घोषणा की है। उनके अनुसार पूर्व मंत्री S. P. Velumani को विधानसभा में AIADMK का नेता बनाया जाएगा, जबकि C. Vijayabaskar को पार्टी का व्हिप नियुक्त किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में प्रोटेम स्पीकर को पहले ही पत्र सौंप दिया गया है।
पार्टी की बैठक और आंतरिक मतभेद
शनमुगम ने बताया कि हाल ही में हुई पार्टी बैठक में अधिकांश विधायकों ने यह प्रस्ताव पारित किया कि AIADMK को भविष्य में बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद अब पार्टी को आत्ममंथन की जरूरत है। उनके अनुसार, हार के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी पार्टी को मिलकर समीक्षा करनी चाहिए।
DMK गठबंधन पर जताई आपत्ति
शनमुगम गुट ने स्पष्ट कहा कि DMK के साथ किसी भी तरह का गठबंधन पार्टी को कमजोर करेगा। उनका कहना है कि ऐसे निर्णयों से AIADMK की राजनीतिक पहचान खत्म हो सकती है।
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तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल
फ्लोर टेस्ट से पहले AIADMK में इस तरह की टूट को राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे पार्टी का आधिकारिक रुख क्या रहता है और यह विभाजन राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में ले जाएगा।
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