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Delhi : एनजीटी ने गोलकोंडा किले में प्राचीन जल कुंड की खराब स्थिति का स्वतः लिया संज्ञान

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Updated: June 22, 2025 • 11:47 PM
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कचरे से भरा हुआ है जल कुंड

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने हैदराबाद के गोलकोंडा किले के अंदर स्थित ऐतिहासिक जल कुंड पानी की टंकी कटोरा हाउस की “खराब” और दयनीय स्थिति को उजागर करने वाली मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (Arun Kumar Tyagi) की अध्यक्षता वाली पीठ ने “ हैदराबाद के गोलकोंडा किले में उपेक्षित कटोरा हाउस पर ध्यान देने की मांग” शीर्षक वाली खबर के बाद स्वप्रेरणा से एक मूल आवेदन पंजीकृत किया।

कभी पानी का स्रोत था जल कुंड

समाचार लेख का हवाला देते हुए पीठ, जिसमें विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे, ने कहा कि टैंक, जो कभी पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत था, अब कचरे से भरा हुआ है और इसमें पानी नहीं बचा है। समाचार में यह भी बताया गया कि कटोरा हौज के आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ रहा है, जिससे टैंक की स्थिति और खराब हो रही है। एनजीटी ने 5 जून को पारित अपने आदेश में कहा, ‘हालांकि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) ने 2025 में जलकुंभी और मलबे को हटाने के लिए 10 दिवसीय सफाई अभियान चलाया था, लेकिन तब से यह पूल फिर से डंपिंग ग्राउंड बन गया है।’ हरित निकाय ने कहा कि समाचार में उजागर किया गया मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के अंतर्गत आता है।

एनजीटी के अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय ने दी है मान्यता

यह कहते हुए कि मामले को स्वतः संज्ञान लेने के एनजीटी के अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय ने मान्यता दी है, न्यायमूर्ति त्यागी की अगुवाई वाली पीठ ने तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), जीएचएमसी और हैदराबाद के जिला मजिस्ट्रेट को मामले में प्रतिवादी पक्ष बनाया। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया, ‘ प्रतिवादियों को हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब/प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया जाए ,’ और मामले को 6 अगस्त को दक्षिणी जोन बेंच के समक्ष आगे की सुनवाई के लिए स्थानांतरित कर दिया।

इसने कहा कि चूंकि कार्रवाई के कारण का स्थान चेन्नई के दक्षिणी जोन बेंच के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए मामले की आगे की सुनवाई वहीं होनी चाहिए। एनजीटी ने आदेश दिया कि, ‘प्रतिवादी (प्राधिकरण) सुनवाई की तिथि से कम से कम एक सप्ताह पहले चेन्नई स्थित इस न्यायाधिकरण की दक्षिणी क्षेत्र पीठ के समक्ष जवाब/ प्रतिक्रिया दाखिल कर सकते हैं।’

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