जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिसके चलते उधमपुर-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) का एक बड़ा हिस्सा भूस्खलन के कारण पूरी तरह बह गया। मंगलवार को हुए इस हादसे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ दिखाई देता है कि कैसे पहाड़ से गिरा मलबा और तेज बारिश ने सड़क को तहस-नहस कर दिया।
इस घटना ने जम्मू-श्रीनगर को जोड़ने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिससे सैकड़ों वाहन फंस गए और कश्मीर घाटी का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क कट गया।
भारी बारिश के कारण जम्मू संभाग में कई स्थानों पर भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। रामबन जिले के चंदरकोट, केला मोड़ और बैटरी चश्मा में भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके चलते NH-44 पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि उधमपुर और काजीगुंड के बीच वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। इस आपदा ने न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि बिजली, पानी की आपूर्ति और मोबाइल नेटवर्क को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रशासन ने लोगों से प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा न करने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को “बेहद गंभीर” बताते हुए कहा कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने 2014 की बाढ़ से तुलना करते हुए सवाल उठाया कि पिछले 11 वर्षों में बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के लिए क्या उपाय किए गए।
भारतीय सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन बचाव कार्यों में जुटे हैं, और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। भारतीय वायुसेना ने भी राहत सामग्री पहुंचाने के लिए सी-130 विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में और भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है। जम्मू में तवी नदी 34 फीट के स्तर पर बह रही है, जो 2014 की बाढ़ के रिकॉर्ड से एक फीट अधिक है। प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, और लोगों से नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर (+91 9906019460, +91 9906019446) जारी किए हैं, ताकि लोग आपात स्थिति में संपर्क कर सकें।
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