Operation Sindoor : ऑपरेशन सिंदूर नूर खान एयरबेस पर हमले को पाकिस्तान की स्वीकारोक्ति

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Operation Sindoor : भारत की ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमलों को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार विस्तार से स्वीकारोक्ति की है। मई में हुए चार दिन के सशस्त्र संघर्ष के आठ महीने बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की कि भारतीय ड्रोन हमलों में रावलपिंडी के चकला क्षेत्र में स्थित नूर खान एयरबेस को नुकसान पहुंचा और सैन्य कर्मी घायल हुए।

डार ने कहा, “36 घंटों में कम से कम 80 ड्रोन भेजे गए। इनमें से 79 को हमने मार गिराया।” उन्होंने दावा किया कि 10 मई की सुबह नूर खान एयरबेस पर हमले के बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की। यह बयान इस्लामाबाद के उस पुराने रुख से अलग है, जिसमें भारतीय हमलों से हुए नुकसान को कम करके दिखाया गया था।

भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, (Operation Sindoor) जिसे 26 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या का जवाब बताया गया। डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने इस संघर्ष के दौरान किसी मध्यस्थता की मांग नहीं की थी। उनके अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने भारत से बातचीत में रुचि दिखाई थी।

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डार के मुताबिक, 10 मई की सुबह रूबियो ने उन्हें फोन कर बताया कि भारत युद्धविराम के लिए तैयार है और पूछा कि क्या पाकिस्तान सहमत होगा। “हम कभी युद्ध नहीं चाहते थे,” डार ने कहा। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि 7 मई की हवाई झड़प में पाकिस्तान ने सात भारतीय लड़ाकू विमान गिराए, लेकिन इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिए।

इस बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दौरान उनके सैन्य सचिव ने उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। “नेता बंकरों में नहीं मरते, वे मैदान में मरते हैं,” उनके इस बयान से उस समय इस्लामाबाद में व्याप्त तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिला है कि नूर खान एयरबेस में पुनर्निर्माण का काम चल रहा है। इस्लामाबाद से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित यह एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। भारत ने इस्तेमाल किए गए हथियारों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस या स्काल्प मिसाइलों, या दोनों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

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Sai Kiran

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