भाषा विवाद में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) की मुश्किलें बढ़ सकती है। बीते दिनों मुंबई के कई जगहों पर लोगों के साथ हो रहे भाषा को लेकर अत्याचार एवं हिंदी भाषियों को लेकर जिस तरह से राज ठाकरे के बयान आ रहे थे उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है। याचिका में ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। यह याचिका वकील घनश्याम उपाध्याय ने दायर की है।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने राज ठाकरे को लेकर बयान दिया
मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा, “नया नगर में कोई मराठी नहीं बोलता और वहां के लोग संविधान में विश्वास नहीं करते, लेकिन वहां शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। कोविड महामारी के दौरान वहां किसी ने मास्क नहीं पहना और न ही टीका लगवाया।
यह लव जिहाद का केंद्र है। देश को इस्लामिक राजधानी बनने से रोकने के लिए हिंदुओं को एकजुट रहने की जरूरत है। पीएम मोदी ने ‘एक हैं तो सुरक्षित हैं’ का नारा दिया। अगर कोई मुस्लिम बीएमसी में कमिश्नर बनता है, तो क्या हमारे लोग, मछुआरे सुरक्षित रहेंगे? हमारी सरकार हिंदुओं की रक्षा करेगी, अगर हिंदुओं पर हिंसा हुई तो हम चुप नहीं रहेंगे।”
महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का क्या मामला है?
महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का मामला हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2025 में, मराठी भाषा को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ संगठनों, खासकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदी भाषी लोगों पर हमलों से जुड़ा है। यह विवाद मराठी भाषा की प्रमुखता और क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर चल रहे तनाव का हिस्सा है, जिसमें हिंदी और अन्य गैर-मराठी भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
2025 में मीरा रोड और ठाणे में हिंदी भाषी दुकानदारों और मजदूरों पर हमले की खबरें सामने आईं। उदाहरण के लिए, मीरा भायंदर में ‘जोधपुर स्वीट्स एंड नमकीन’ के मालिक बाबूलाल चौधरी पर MNS कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मराठी न बोलने के कारण हमला किया।
अप्रैल 2025 में, दो युवतियों को अंग्रेजी में “एक्सक्यूज़ मी” कहने पर कुछ लोगों ने पीटा, जिसे मराठी भाषा विवाद से जोड़ा गया।
इन घटनाओं में हिंदी भाषी मजदूरों, व्यापारियों और आम लोगों को मराठी न बोलने के लिए निशाना बनाया गया, जिसमें मारपीट, गाली-गलौज और दुकानों पर हमले शामिल हैं।
बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। कुछ स्थानीय संगठन, जैसे MNS और शिवसेना (UBT), हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव को मराठी के लिए खतरा मानते हैं।
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ठाकरे किस लिए प्रसिद्ध है?
वह अपने व्यंग्यात्मक कार्यों के लिए जाने जाते हैं, विशेष रूप से उनके 1847-1848 के उपन्यास वैनिटी फेयर, जो ब्रिटिश समाज का एक विहंगम चित्रण है, और 1844 के उपन्यास द लक ऑफ बैरी लिंडन, जिसे स्टेनली कुब्रिक ने 1975 में एक फिल्म के लिए रूपांतरित किया था।
ठाकरे की जाति क्या है?
यह परिवार मराठी हिंदुओं की चंद्रसेनिया कायस्थ प्रभु जाति से ताल्लुक रखता है। उनके पिता केशव भारत में जन्मे ब्रिटिश लेखक विलियम मेकपीस ठाकरे के प्रशंसक थे और उन्होंने अपना उपनाम पनवेलकर से बदलकर “ठाकरे” रख लिया था, जो उनके पैतृक उपनाम “ठाकरे” का अंग्रेजीकृत रूप था।