नई दिल्ली,। भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोड़ पर हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) और अमेरिकी स्टेट सचिव मार्को रूबियो (Marco Rubiyo) के बीच फोन पर हुई लंबी बातचीत ने ठप पड़ी ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। बातचीत का मुख्य केंद्र द्विपक्षीय व्यापारिक गतिरोध को समाप्त करना और भविष्य के लिए ठोस आर्थिक ढांचा तैयार करना रहा।
बाजार में तनाव और टैरिफ की चेतावनी
यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच कड़वाहट बढ़ गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी ने कूटनीतिक गलियारों में चिंता बढ़ा दी थी।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में उम्मीदें
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में कदम आगे बढ़ सकते हैं।
रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार से चर्चा
जयशंकर और रूबियो ने खनिज, न्यूक्लियर सहयोग, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी पर भी विस्तार से चर्चा की।
अमेरिका ने सकारात्मक संकेत दिए
भारत में अमेरिकी राजदूत गोर ने इस संवाद को अत्यंत सकारात्मक बताते हुए कहा कि अगले महीने व्यापारिक मुद्दों पर उच्च स्तरीय बैठकें शुरू हो सकती हैं।
2030 तक 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
भारत और अमेरिका ने साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। व्यापार घाटा कम करने के लिए भारत ने अमेरिका से ऊर्जा और रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने का भरोसा भी दिलाया।
नए अवसर और नागरिक परमाणु सहयोग
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा और नागरिक परमाणु सहयोग बढ़ाने को उत्सुक है।
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टैरिफ में ढील से नई व्यापार इबारत
भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिका भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ को हटा सकता है। इससे आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार की नई इबारत लिखी जा सकती है।
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