नई दिल्ली। रसोई गैस की आपूर्ति में आई कमी के बीच भारत को कूटनीतिक स्तर पर बड़ी राहत मिली है। भारत और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने (Strait of Hormuz) में फंसे भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि इन जहाजों के भारत पहुंचने से घरेलू बाजार में गैस की आपूर्ति को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद बनी सहमति
प्रधानमंत्री (Narendra Modi) और ईरान के राष्ट्रपति (Masoud Pezeshkian) के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और उसके असर पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने बातचीत में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को भारत की प्राथमिकता बताया तथा कूटनीति के माध्यम से समाधान पर जोर दिया।
विदेश मंत्रियों की वार्ता भी रही अहम
इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच भी विस्तृत चर्चा हुई। दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता के बाद फंसे जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने पर सहमति बनी। भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fattahi ने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का उदाहरण बताया।
कई अन्य भारतीय जहाज भी फंसे
जानकारी के अनुसार मौजूदा समय में लगभग दो दर्जन भारतीय जहाज Strait of Hormuz के आसपास के समुद्री क्षेत्र में मौजूद हैं। इन्हें सुरक्षित मार्ग दिलाने के लिए भारत सरकार लगातार ईरानी प्रशासन के संपर्क में है। राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है ताकि बाकी जहाजों को भी सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने की अनुमति मिल सके।
आपूर्ति सुधरने से कीमतों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी से भरे जहाजों के भारत पहुंचने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बेहतर होगी और गैस के भंडार में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे बाजार में बनी अनिश्चितता कम होने और कीमतों पर दबाव घटने की उम्मीद जताई जा रही है।
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ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम कदम
विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना भारत के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बना हुआ है।
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