नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (CP Radha Krishnan) के हालिया दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाए गए हैं। इस दौरे को दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
ओसीआई नियमों में बड़ा बदलाव
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि भारत सरकार ने ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब श्रीलंका में बसे प्रवासी भारतीयों की पांचवीं और छठी पीढ़ी को भी OCI कार्ड के लिए पात्र माना जाएगा, जबकि पहले यह सुविधा चौथी पीढ़ी तक सीमित थी।
दस्तावेज प्रक्रिया हुई आसान
इसके साथ ही OCI कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेजों को लेकर प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। अब श्रीलंका सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्र, पुराने भारत-श्रीलंका पासपोर्ट और कोलंबो व कैंडी स्थित भारतीय मिशनों के रिकॉर्ड को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
मछुआरों की रिहाई पर जताया आभार
दौरे के दौरान भारत ने श्रीलंका सरकार का आभार व्यक्त किया। उपराष्ट्रपति ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को हाल ही में भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए धन्यवाद दिया। जानकारी के अनुसार, बीते कुछ हफ्तों में 47 भारतीय मछुआरों को रिहा किया गया है, जिन्हें जल्द ही भारत वापस लाया जाएगा।
संवेदनशील मुद्दे पर सकारात्मक संकेत
मछुआरों का मुद्दा लंबे समय से दोनों देशों के बीच संवेदनशील रहा है। ऐसे में हालिया रिहाई को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी माना कि इस समस्या का स्थायी समाधान दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है।
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रिश्तों में आई नई ऊर्जा
विशेषज्ञों का मानना है कि OCI नियमों में ढील और मानवीय मुद्दों पर सहयोग, दोनों ही कदम भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा भरने वाले हैं। यह दौरा न केवल प्रवासी भारतीयों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है।
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