नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फिल्म प्रमाणन और सेंसरशिप की प्रक्रिया को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आधिकारिक घोषणा करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कमान (Shashi Shekhar Vempati) को सौंप दी है। वेम्पति अगले तीन वर्षों तक इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। फिल्म जगत और मीडिया गलियारों में इस नियुक्ति को लेकर काफी सकारात्मक हलचल है, क्योंकि सेंसर बोर्ड फिल्मों की सामग्री और उनकी सार्वजनिक रिलीज को लेकर देश की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक है।
प्रसून जोशी के इस्तीफे के बाद हुई नियुक्ति
यह नियुक्ति Prasoon Joshi के इस्तीफे के बाद हुई है। दरअसल, प्रसून जोशी को अब (Prasar Bharati) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जिसके कारण उन्होंने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से अपनी जिम्मेदारी छोड़ दी थी। उनके कार्यकाल के दौरान बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए और कुछ विवादों का भी सामना किया।
मीडिया और डिजिटल क्षेत्र का व्यापक अनुभव
अब सरकार ने एक अनुभवी और तकनीकी रूप से सक्षम नाम की तलाश के बाद शशि शेखर वेम्पति पर भरोसा जताया है, ताकि बोर्ड के कामकाज में आधुनिक दृष्टिकोण और नई ऊर्जा का समावेश किया जा सके। वेम्पति मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग और सार्वजनिक संचार के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्हें नीति निर्माण और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव प्राप्त है।
सेंसर प्रक्रिया में पारदर्शिता की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में फिल्मों के प्रमाणन की प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध होगी। भारतीय फिल्म उद्योग में अक्सर सेंसरशिप के कड़े नियमों और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर तीखी बहस होती रहती है। ऐसे में वेम्पति के पास डिजिटल युग की नई चुनौतियों और फिल्म निर्माताओं की रचनात्मक आजादी के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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तकनीकी सुधारों पर रहेगी नजर
फिल्म उद्योग और मीडिया विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि वेम्पति तकनीकी सुधारों के जरिए बोर्ड की कार्यप्रणाली को कितना सुगम और आधुनिक बना पाते हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में सीबीएफसी की कार्यशैली में कई नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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