राहुल गांधी का वित्त मंत्री को पत्र
नई दिल्ली: राहुल गांधी ने अपने पत्र में एक्स-सर्विसमेन(Soldiers) कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) की खस्ताहाली पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत निजी अस्पतालों के लगभग ₹12,000 करोड़ से अधिक के मेडिकल बिल बकाया हैं। बजट आवंटन आवश्यकता से 30% कम होने के कारण कई बड़े अस्पताल इस योजना से बाहर हो रहे हैं। इसका सीधा असर पूर्व सैनिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें कैंसर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है या इलाज में देरी का सामना करना पड़ रहा है।
दिव्यांगता पेंशन पर टैक्स: मनोबल पर प्रहार का मुद्दा
पत्र में दूसरा बड़ा मुद्दा 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर नियमों का है। नए प्रावधान के अनुसार, अब केवल उन सैनिकों(Soldiers) की दिव्यांगता पेंशन कर-मुक्त (Tax-free) रहेगी जिन्हें चोट के कारण सेवा से बाहर कर दिया गया था। राहुल गांधी और विभिन्न सैनिक संगठनों का तर्क है कि जो सैनिक दिव्यांगता के बावजूद अपना कार्यकाल पूरा कर रिटायर हुए, उनकी पेंशन पर टैक्स लगाना अनुचित है। विरोध करने वालों का मानना है कि दिव्यांगता पेंशन एक ‘राहत’ है, ‘आय’ नहीं, और इस पर कर लगाना दशकों पुरानी परंपरा का उल्लंघन है।
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संसदीय स्थायी समिति की भूमिका और संवैधानिक अधिकार
राहुल गांधी रक्षा मामलों की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग(Soldiers) कमेटी के सदस्य के रूप में इन मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। भारत में कुल 24 ऐसी समितियां हैं, जिनमें से 16 लोकसभा और 8 राज्यसभा के अंतर्गत आती हैं। प्रत्येक समिति में 31 सदस्य (21 लोकसभा और 10 राज्यसभा) होते हैं। संविधान के अनुच्छेद 105 और 118 के तहत इन समितियों को मंत्रालयों के कामकाज की जांच करने, बजट की समीक्षा करने और नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार करने का विशेष अधिकार प्राप्त है। राहुल का यह पत्र इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
1 अप्रैल 2026 से दिव्यांगता पेंशन के आयकर नियमों में क्या मुख्य बदलाव होने जा रहा है?
नए नियम के तहत केवल उन सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन टैक्स-फ्री होगी जिन्हें दिव्यांगता के कारण समय से पहले सेवा से बाहर किया गया है। अपनी पूरी सेवा अवधि पूरी कर रिटायर होने वाले दिव्यांग सैनिकों की ‘इम्पेयरमेंट रिलीफ’ अब आयकर के दायरे में आएगी।
पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चयन कौन करता है और उनका कार्यकाल कितना होता है?
स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों को सदन के अध्यक्ष (स्पीकर/चेयरमैन) द्वारा नामित (Nominate) किया जाता है। अधिकांश विभागीय समितियों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
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