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West Bengal- विपक्षी वोटों के बिखराव ने बिगाड़ा टीएमसी का खेल

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 18, 2026 • 11:56 AM
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मुख्य बातें: 

कोलकाता। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने विपक्षी दलों के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे का सबसे ज्यादा नुकसान तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उठाना पड़ा। चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि विपक्षी एकजुटता की कमी ने भाजपा को बड़ी बढ़त दिलाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 207 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों तक सिमट गई। कांग्रेस को दो और वाम दलों को एक सीट पर जीत मिली।

कांग्रेस से गठबंधन न करना पड़ा भारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री (Mamata Banerjee) ने चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन किया होता, तो नतीजे काफी अलग हो सकते थे। कई सीटों पर कांग्रेस (Congress) को मिले वोट, भाजपा और टीएमसी के बीच जीत-हार के अंतर से भी ज्यादा रहे। जिन सीटों पर पहले टीएमसी मजबूत स्थिति में थी, वहां विपक्षी वोटों के बंटवारे ने भाजपा को सीधा फायदा पहुंचाया।

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मुस्लिम बहुल इलाकों में भी भाजपा को बढ़त

मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में भी वोटों का विभाजन टीएमसी पर भारी पड़ा। इन 43 सीटों में भाजपा ने 20 सीटों पर जीत दर्ज की। पिछले चुनाव में यही इलाका टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता था, जहां पार्टी ने 35 सीटें जीती थीं। इस बार मुस्लिम वोट कांग्रेस, लेफ्ट, इंडियन सेकुलर फ्रंट और अन्य दलों में बंट गए, जिससे भाजपा को फायदा मिला।

लेफ्ट-कांग्रेस के वोट बने निर्णायक फैक्टर

विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम बंगाल में वामदलों का करीब सात फीसदी स्थायी वोट बैंक अब भी मौजूद है। कई सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट को मिले संयुक्त वोट टीएमसी की हार के अंतर से कहीं ज्यादा रहे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि भाजपा को चुनौती देने के लिए क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस को भविष्य में बेहतर तालमेल के साथ चुनाव लड़ना होगा। गुजरात और दिल्ली के चुनावों में भी विपक्षी वोटों के बंटवारे का असर देखने को मिला था।

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