खिताबी भिड़ंत और हेड-टू-हेड रिकॉर्ड
स्पोर्ट्स डेस्क: आज वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु(WPL) का सामना दिल्ली कैपिटल्स (DC) से होगा। दिल्ली के लिए यह लगातार चौथा फाइनल है, लेकिन वह अब तक एक भी ट्रॉफी नहीं जीत सकी है। आंकड़ों की बात करें तो दोनों के बीच खेले गए कुल 10 मैचों में दिल्ली ने 6 बार जीत दर्ज की है, जबकि RCB को 4 बार सफलता मिली है। हालांकि, 2024 के फाइनल में RCB ने ही दिल्ली को हराकर अपना पहला खिताब जीता था, जो मंधाना की टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त देता है।
ऑरेंज और पर्पल कैप की दिलचस्प रेस
व्यक्तिगत प्रदर्शन में भी कड़ी टक्कर है। RCB की कप्तान स्मृति मंधाना (290 रन) को ऑरेंज कैप हासिल करने के लिए आज 53 रनों की जरूरत है, ताकि वह हरमनप्रीत कौर (342 रन) को पीछे छोड़ सकें। गेंदबाजी में दिल्ली की नंदिनी शर्मा(WPL) इतिहास रचने के करीब हैं। उन्हें पर्पल कैप की रेस में सोफी डिवाइन (17 विकेट) को पछाड़ने के लिए केवल 2 विकेट चाहिए। इसके अलावा, RCB की नदीन डी क्लर्क (15 विकेट) भी इस दौड़ में मजबूती से बनी हुई हैं।
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पिच का मिजाज और चेज की चुनौती
कोटांबी स्टेडियम की पिच अब बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग साबित हो रही है। यहाँ पिछले 11 मैचों में से 9 मैच बाद में बल्लेबाजी करने वाली (चेज करने वाली) टीम ने जीते हैं। यानी टॉस जीतने वाली कप्तान जेमिमा रॉड्रिग्ज या स्मृति मंधाना पहले गेंदबाजी चुनना चाहेंगी। पिच पर शुरुआती कुछ ओवरों में गेंदबाजों को मदद मिल सकती है, लेकिन ओस(WPL) का प्रभाव दूसरी पारी में बल्लेबाजी को काफी आसान बना सकता है।
क्या स्मृति मंधाना इस सीजन की टॉप स्कोरर बन सकती हैं?
हाँ, स्मृति मंधाना के अभी 290 रन हैं और टॉप(WPL) पर काबिज हरमनप्रीत कौर के 342 रन हैं। यदि मंधाना आज फाइनल में 53 रन और बना लेती हैं, तो वह ऑरेंज कैप की हकदार बन जाएंगी।
दिल्ली कैपिटल्स के लिए इस फाइनल में सबसे बड़ा खतरा कौन है?
दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चुनौती RCB की संतुलित गेंदबाजी और ग्रेस हैरिस की आक्रामक बल्लेबाजी है। साथ ही, दिल्ली को अपने पिछले तीन फाइनल हारने के मानसिक दबाव से भी पार पाना होगा।
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