हैदराबाद। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क (Bhatti Vikramarka) ने कहा कि आज धार्मिक भावनाओं के नाम पर कॉरपोरेट और फासीवादी ताकतें आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों से ध्यान भटका रही हैं और देश में संसदीय लोकतंत्र को चुनौती दे रही हैं। वे मंगलवार को खम्मम जिला मुख्यालय (Khammam district headquarters) में सीपीआई के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। भट्टी विक्रमार्क ने वामपंथी दलों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर आगे बढ़ें और संयुक्त संघर्षों के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र को चुनौती देने वाली कॉरपोरेट ताकतों तथा आर्थिक व सामाजिक मुद्दों पर देश को गुमराह करने वाली शक्तियों पर अंकुश लगाएँ।
देश की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ना चाहिए आगे
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वामपंथ को केवल शोषक बनाम शोषित के दृष्टिकोण तक सीमित न रहकर, देश की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि खम्मम जिला विविध विचारधाराओं के प्रसार का स्वागत करता है और आतिथ्य का प्रतीक है। उन्होंने देशभर से खम्मम पहुँचे वामपंथी नेताओं का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया। भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि सीपीआई के 100 वर्षों के इतिहास में अनेक बलिदान और उतार-चढ़ाव रहे हैं तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
संविधान की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी
उन्होंने कहा, ‘संविधान की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है, अन्यथा आम आदमी अपने मूल अधिकारों से वंचित हो जाएगा। भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मतदान अधिकारों को कमजोर कर रही है और संविधान में संशोधन का प्रयास कर रही है।’ भट्टी विक्रमार्क ने इस बात पर बल दिया कि कांग्रेस और वामपंथी दलों को देश में एक दीर्घकालिक राजनीतिक यात्रा साथ मिलकर तय करनी चाहिए।
लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं?
जनता की भागीदारी से चलने वाली शासन व्यवस्था का आशय इससे होता है। इसमें नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और सरकार जनता की इच्छा, अधिकारों तथा कानून के अनुसार कार्य करती है, जिससे समानता, स्वतंत्रता और जवाबदेही बनी रहती है।
लोकतंत्र का जनक कौन था?
प्राचीन यूनान के एथेंस नगर-राज्य को इस व्यवस्था की जन्मस्थली माना जाता है। वहां के विचारक क्लिस्थनीज को इसका जनक कहा जाता है, जिन्होंने नागरिकों की भागीदारी और मतदान प्रणाली को व्यवस्थित रूप दिया था।
लोकतंत्र क्या है?
शासन की वह प्रणाली इसमें आती है, जिसमें सत्ता का स्रोत आम जनता होती है। निर्णय या तो सीधे नागरिकों द्वारा या उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से लिए जाते हैं, जिससे सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी बनी रहती है।
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