एससीसीएल अनियमितताओं पर सीबीआई जाँच की मांग
हैदराबाद। पूर्व मंत्री और बीआरएस विधायक टी. हरीश राव (T. Harish Rao) ने मंगलवार को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से 2024 के बाद सिंगरेणी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) में किए गए सभी टेंडरों और नीतिगत निर्णयों की सीबीआई जाँच कराने का आग्रह किया। हरीश राव ने एसआईटी के समक्ष पेश होने से पहले तेलंगाना भवन में मीडिया को केंद्रीय मंत्री को लिखा गया पत्र साझा किया। बीआरएस विधायक ने बताया कि 2024 के बाद एससीसीएल ने टेंडरों में बोली लगाने के लिए साइट विज़िट सर्टिफिकेट की अनिवार्यता लागू की, जो कंपनी के इतिहास में अभूतपूर्व है और जिसे कोल इंडिया लिमिटेड ने भी कभी लागू नहीं किया।
ठेके अपेक्षित दरों से 7 से 10 प्रतिशत अधिक पर दिए गए
उन्होंने कहा कि इस नए प्रावधान के बाद कई टेंडर रद्द कर दिए गए और ठेके अपेक्षित दरों से 7 से 10 प्रतिशत अधिक पर दिए गए। यह राष्ट्रीय स्तर के रुझानों के विपरीत है, जहाँ ओबी कोल ब्लॉक के टेंडर आमतौर पर 10 से 22 प्रतिशत कम दरों पर दिए जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, एससीसीएल में ठेके 7, 8, 10 या यहाँ तक कि 20 प्रतिशत कम दरों पर दिए जाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिस्पर्धात्मक रूप से दिए गए ठेकों को व्यवस्थित रूप से रद्द कर उन्हें अधिक दरों पर पुनः आवंटित करना निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को जानबूझकर कमजोर करने का संकेत देता है, जिससे एससीसीएल को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
ठेकेदारों को सौंप दी गई डीज़ल आपूर्ति की जिम्मेदारी
बीआरएस विधायक ने यह भी कहा कि आईओसीएल से सीधे थोक डीज़ल खरीदने की लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और डीज़ल आपूर्ति की जिम्मेदारी ठेकेदारों को सौंप दी गई। उनके अनुसार, इससे परियोजना लागत बढ़ी और अनावश्यक जीएसटी का बोझ भी पड़ा। ‘इन निर्णयों के पीछे कोई पारदर्शी औचित्य नहीं है, जिससे कमीशन के आधार पर हेरफेर की आशंका और बढ़ जाती है। चिंताजनक बात यह है कि एससीसीएल बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नामित निदेशक, जिनका मुख्य कर्तव्य कंपनी के हितों की रक्षा करना है, इस पर मौन हैं।’
केवल सीबीआई कर सकती है निष्पक्ष जाँच
उन्होंने बताया कि सिंगरेणी पिछले दो वर्षों से नियमित चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर के बिना काम कर रही है। हरीश राव ने जोर देकर कहा कि केवल सीबीआई जाँच ही साइट विज़िट प्रमाणन प्रणाली, प्रतिस्पर्धी टेंडरों की रद्दीकरण प्रक्रिया, उन्हें अधिक दरों पर पुनः आवंटित करने, थोक डीज़ल खरीद बंद करने और राजनीतिक पदाधिकारियों, ठेकेदारों, एससीसीएल अधिकारियों तथा बोर्ड सदस्यों के बीच किसी संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जाँच कर सकती है।
हरीश राव कौन सी जाति की है?
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार टी. हरीश राव तेलंगाना के वेलामा समुदाय से संबंधित माने जाते हैं। वे लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और अपनी पहचान प्रशासनिक अनुभव तथा संगठनात्मक भूमिका के कारण बनाते हैं।
हरीश राव और चंद्रशेखर राव के बीच क्या संबंध है?
परिवारिक रूप से दोनों रिश्तेदार हैं। टी. हरीश राव, के. चंद्रशेखर राव के भांजे हैं और राजनीतिक रूप से भी लंबे समय तक उनके साथ काम करते रहे हैं, खासकर तेलंगाना आंदोलन और बाद की सरकारों में।
क्या हरीश रावत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं?
हाँ, वे उत्तराखंड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने राज्य में कई बार सरकार का नेतृत्व किया और लंबे समय तक राष्ट्रीय व प्रादेशिक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है।
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