हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार (Central government) से मांग की है कि विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र तुरंत बुलाया जाए। मुख्यमंत्री ने सचिवालय में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इंडिया अलायंस संसद में महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) का समर्थन करने के लिए तैयार है। रेवंत रेड्डी ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने की प्रेरणा राजीव गांधी की सोच से मिलती है, जिन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की शुरुआत कर राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था।
महिला आरक्षण विधेयक को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी को एक दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने देश में सूचना प्रौद्योगिकी की नींव रखकर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य के गठन में साहसिक निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि तेलंगाना और गांधी परिवार के बीच गहरा भावनात्मक संबंध है और यह संबंध आने वाले समय में भी मजबूत बना रहेगा। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर टैंक बंड स्थित प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कि गई । इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ मंत्री पोन्नम प्रभाकर, सरकारी सलाहकार वी. हनुमंत राव, सांसद, विधायक, एमएलसी और नगर निगम अध्यक्षों ने भी राजीव गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
भारत में महिला आरक्षण कब लागू हुआ था?
स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 1993 में लागू की गई थी। 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया गया। इसके बाद कई राज्यों ने महिलाओं के लिए आरक्षण प्रतिशत बढ़ाया भी। संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण से संबंधित कानून हाल के वर्षों में पारित किया गया है। इसका उद्देश्य राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना माना जाता है।
33 महिला आरक्षण क्या है?
महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था को महिला आरक्षण कहा जाता है। इसका उद्देश्य राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाना है। इस व्यवस्था के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की कुछ सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित की जा सकती हैं। लंबे समय से इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा होती रही है। महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
महिलाओं के लिए 35 आरक्षण क्या है?
कुछ राज्यों और सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत तक आरक्षण या विशेष प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था राज्य सरकारों और विभागों के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। शिक्षा, सरकारी सेवाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं को अवसर बढ़ाने के लिए ऐसे प्रावधान लागू किए जाते हैं। इसका उद्देश्य रोजगार और प्रशासनिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना है। अलग-अलग राज्यों में आरक्षण प्रतिशत में अंतर देखा जा सकता है।
भारत में औरतों के लिए आरक्षण की व्यवस्था क्या है?
देश में महिलाओं के लिए पंचायत, नगर निकाय, शिक्षा और कुछ सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। कई राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाता है। सरकारी योजनाओं और नीतियों के माध्यम से महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व में अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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