हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव (N. Ramchander Rao) ने राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘गुंडा राज’ कायम हो गया है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। नलगोंडा के एक सरकारी अस्पताल में घायल भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद राव ने मीडिया से कहा कि चंदूर नगरपालिका (Chandur Municipality) में कांग्रेस समर्थकों ने भाजपा के छह कार्यकर्ताओं पर हमला किया, जिनमें से चार अभी भी उपचाराधीन हैं।
घटना को राजनीतिक साजिश करार दिया
उन्होंने इस घटना को राजनीतिक साजिश करार दिया। राव ने पुलिस पर भी पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हल्के मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर भूमि कब्जा, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध शराब कारोबार में संलिप्त होने के आरोप भी लगाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाएं जारी रहीं तो भाजपा कड़ा विरोध करेगी और दोषियों को सजा दिलाकर ही दम लेगी।
कानून व्यवस्था क्या होती है?
समाज में शांति, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए बनाई गई नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था को कानून व्यवस्था कहा जाता है। इसके अंतर्गत सरकार, पुलिस और न्यायपालिका मिलकर काम करते हैं ताकि अपराध रोके जा सकें और नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें। जब किसी क्षेत्र में अपराध बढ़ता है या अशांति फैलती है, तो कहा जाता है कि वहां की कानून व्यवस्था कमजोर है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना होता है।
पुलिस व्यक्ति को कब गिरफ्तार कर सकती है?
किसी व्यक्ति को तब गिरफ्तार किया जा सकता है जब उसके खिलाफ पर्याप्त संदेह या साक्ष्य हों कि उसने अपराध किया है। गंभीर अपराध (संज्ञेय अपराध) के मामलों में पुलिस बिना वारंट के भी गिरफ्तारी कर सकती है, जबकि अन्य मामलों में अदालत से वारंट आवश्यक होता है। गिरफ्तारी की प्रक्रिया Code of Criminal Procedure के तहत निर्धारित की गई है, जिसमें आरोपी के अधिकारों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
भारत में टोटल कितने कानून हैं?
देश में कानूनों की कुल संख्या निश्चित रूप से बताना कठिन है, क्योंकि समय-समय पर नए कानून बनाए जाते हैं और पुराने कानूनों में संशोधन या निरस्तीकरण होता रहता है। केंद्र और राज्यों के अलग-अलग कानून मिलाकर इनकी संख्या हजारों में है। संसद द्वारा पारित केंद्रीय कानूनों के अलावा प्रत्येक राज्य की विधानसभाएं भी अपने-अपने कानून बनाती हैं। इसलिए कुल संख्या लगातार बदलती रहती है और इसका कोई एक स्थायी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
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