US-इंडोनेशिया रक्षा समझौता और इसके मायने
वाशिंगटन: 13 अप्रैल 2026 को पेंटागन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ और इंडोनेशियाई(Trump) रक्षा मंत्री सफरी शमसुद्दीन ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस डील के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में निर्बाध आवाजाही की अनुमति मिल गई है। यह समझौता(Agreement) ऐसे समय में हुआ है जब हॉर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि यह केवल एक सहयोग नहीं, बल्कि मलक्का स्ट्रेट पर अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने की अमेरिकी चाल है।
मलक्का स्ट्रेट: दुनिया की ‘लाइफलाइन’ और चीन का ‘डिलेमा’
मलक्का स्ट्रेट हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। वैश्विक व्यापार(Global Trade) का 40% और दुनिया की 30% तेल सप्लाई इसी संकरे रास्ते से गुजरती है। चीन के लिए यह सबसे बड़ी कमजोरी है क्योंकि उसका 80% तेल आयात यहीं से होता है। पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। अमेरिका का यहाँ सक्रिय होना सीधे तौर पर चीन की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को चुनौती देना है।
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भारत की रणनीतिक भूमिका और फायदा
भारत के लिए मलक्का स्ट्रेट का महत्व निर्विवाद है क्योंकि देश का 55% व्यापार इसी रास्ते से होता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह इस जलमार्ग के मुहाने पर स्थित हैं, जो भारत को एक प्राकृतिक बढ़त देते हैं। कैंपबेल बे में स्थित INS बाज एयर स्टेशन से भारत इस पूरे क्षेत्र की निगरानी करता है। अमेरिका के इस कदम से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग और भी गहरा हो सकता है, जिससे चीन की विस्तारवादी नीतियों पर लगाम लगेगी।
मलक्का स्ट्रेट को चीन की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी क्यों माना जाता है?
चीन अपनी औद्योगिक जरूरतों के लिए भारी मात्रा में तेल आयात करता है और इसका 80% हिस्सा मलक्का स्ट्रेट के रास्ते आता है। चूंकि यह रास्ता बेहद संकरा है (फिलिप चैनल पर मात्र 3 किमी), इसलिए युद्ध या तनाव की स्थिति में इसे आसानी से ब्लॉक किया जा सकता है, जिससे चीन की पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है।
US-इंडोनेशिया डील का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह डील भारत के रणनीतिक हितों के अनुकूल है। अमेरिका की मौजूदगी से इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बना रहेगा। चूंकि भारत के अंडमान द्वीप मलक्का के पास हैं, इसलिए भविष्य में अमेरिकी नौसेना और भारतीय नौसेना के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त गश्त (Patrol) में बढ़ोतरी हो सकती है।