स्लो ओवर रेट के लिए लगा जुर्माना
स्पोर्ट्स डेस्क: चेपॉक स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने 20 ओवर पूरे करने में विफल रही। आईपीएल की आचार संहिता(Code of Conduct) के तहत, यह इस सीजन में केकेआर की पहली गलती थी। इसी कारण नियमों के मुताबिक कप्तान अजिंक्य रहाणे पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य टी20 क्रिकेट की रफ्तार को बनाए रखना और मैचों को समय पर समाप्त करना है।
स्लो ओवर रेट: क्या है यह नियम?
आईपीएल के नियमों के अनुसार, प्रत्येक टीम को अपनी गेंदबाजी पारी को 90 मिनट (रणनीतिक ब्रेक सहित) के भीतर खत्म करना होता है। यदि पारी समाप्त होने के समय टीम तय समय से पीछे होती है, तो उसे ‘स्लो ओवर रेट’ का दोषी माना जाता है। फील्ड अंपायर और मैच रेफरी खेल के दौरान इसकी लगातार निगरानी(Supervision) करते हैं और पारी के अंत में इसकी पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाती है।
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अगली गलती पड़ सकती है और भी भारी
रहाणे और केकेआर के लिए चेतावनी साफ है—गलती दोहराई तो सजा सख्त होगी। अगर सीजन में दूसरी बार ऐसी चूक होती है, तो कप्तान पर जुर्माना दोगुना होकर 24 लाख रुपये हो जाएगा और टीम के अन्य खिलाड़ियों को भी अपनी मैच फीस का 25% हिस्सा जुर्माने के तौर पर देना होगा। तीसरी गलती होने पर कप्तान पर न केवल 30 लाख का जुर्माना लगेगा, बल्कि उन पर एक मैच का प्रतिबंध भी लग सकता है।
अजिंक्य रहाणे पर केवल 12 लाख का ही जुर्माना क्यों लगाया गया?
आईपीएल के नियमों के अनुसार, सीजन में ‘स्लो ओवर रेट’ का पहला अपराध होने पर केवल कप्तान पर न्यूनतम जुर्माना (12 लाख रुपये) लगाया जाता है। इसमें टीम के अन्य खिलाड़ियों पर कोई वित्तीय पेनल्टी नहीं लगती, इसलिए रहाणे पर यह कार्रवाई की गई।
स्लो ओवर रेट की तीसरी गलती होने पर सजा का क्या प्रावधान है?
यदि कोई टीम एक ही सीजन में तीसरी बार स्लो ओवर रेट की दोषी पाई जाती है, तो कप्तान पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है और साथ ही उन पर एक मैच का बैन (प्रतिबंध) भी लगाया जाता है। इसके अलावा, टीम के बाकी खिलाड़ियों पर भी मैच फीस का 50% जुर्माना लगता है।