कविता का ‘तेलंगाना थल्ली’ प्रतिमा को लेकर सरकार पर हमला
हैदराबाद। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष और पूर्व सांसद कल्वाकुंतला कविता (kalvakuntla Kavitha) ने सोमवार को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर ‘तेलंगाना थल्ली’ (मदर तेलंगाना) के स्वरूप में बदलाव कर तेलंगाना आंदोलन के इतिहास को मिटाने का आरोप लगाया है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल द्वारा तेलंगाना विधानसभा में ‘तेलंगाना थल्ली’ की प्रतिमा के अनावरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कविता ने कहा कि पारंपरिक ‘बथुकम्मा’ के बिना दी गई यह प्रस्तुति तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान और राज्य आंदोलन की भावना का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं की तेलंगाना आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी, वे अब इसके इतिहास को विकृत करने की कोशिश कर रहे हैं। कविता ने कहा कि बथुकम्मा (Bathukamma) तेलंगाना की संस्कृति का प्रतीक है और आंदोलन के दौरान जनता ने बथुकम्मा पकड़े हुए ही तेलंगाना थल्ली की मूल छवि को गढ़ा था।
प्रतीकात्मक स्वरूप को बदलना बलिदानों को मिटाने के समान
कविता ने जोर देकर कहा कि तेलंगाना थल्ली के प्रतीकात्मक स्वरूप को बदलना आंदोलन की यादों और बलिदानों को मिटाने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी कि बथुकम्मा के बिना इस प्रतिमा को स्वीकार नहीं किया जाएगा और घोषणा की कि जब उनकी पार्टी सत्ता में वापस आएगी, तो इसी स्थान पर आंदोलन के दौर वाली मूल तेलंगाना थल्ली की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा लगाई गई इस प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उनके पार्टी कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसी के साथ, कविता ने धर्म समाज पार्टी के अध्यक्ष विशारदन महाराज की गिरफ्तारी की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने इस गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें अलग-अलग थानों में घुमाकर प्रताड़ित कर रही है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
तेलंगाना का पुराना नाम क्या था?
ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र लंबे समय तक हैदराबाद राज्य का हिस्सा माना जाता था। स्वतंत्रता से पहले यह इलाका निज़ाम के शासन के अधीन था और बाद में 1956 में भाषाई आधार पर पुनर्गठन के दौरान इसे आंध्र प्रदेश में शामिल कर दिया गया। वर्ष 2014 में अलग राज्य बनने से पहले इस क्षेत्र को तेलंगाना क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इस तरह हैदराबाद राज्य और बाद में आंध्र प्रदेश का हिस्सा इसका प्रमुख ऐतिहासिक नाम और प्रशासनिक पहचान रही है।
तेलंगाना का मुख्य धर्म कौन सा है?
राज्य में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, लेकिन जनसंख्या के आधार पर हिंदू धर्म सबसे अधिक माना जाता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में इस्लाम और ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों की भी अच्छी संख्या है। धार्मिक विविधता तेलंगाना की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां कई प्रसिद्ध मंदिर, मस्जिद और चर्च मौजूद हैं, जो अलग-अलग समुदायों की आस्था और परंपराओं को दर्शाते हैं।
तेलंगाना का राष्ट्रीय वृक्ष कौन सा है?
राज्य का आधिकारिक वृक्ष Prosopis cineraria माना जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में जामी या शमी भी कहा जाता है। यह पेड़ शुष्क और गर्म क्षेत्रों में आसानी से उग जाता है और पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इसकी छाया, लकड़ी और पत्तियां ग्रामीण जीवन में कई तरह से काम आती हैं। पारंपरिक मान्यताओं में भी इस वृक्ष का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया जाता है।
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