Crime : अंतरराज्यीय गांजा तस्करी रैकेट का भंडाफोड़

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हैदराबाद। एक बड़े मादक पदार्थ विरोधी अभियान में, कुकाटपल्ली जोन की विशेष अभियान टीम (एसओटी) के जवानों ने पाटनचेरु पुलिस (Patancheru Police) के साथ मिलकर एक अंतरराज्यीय गांजा तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया और पाटनचेरु पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत मुथांगी के पास लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य का 400 किलोग्राम सूखा गांजा जब्त किया। पुलिस ने ओडिशा से महाराष्ट्र तक हैदराबाद के रास्ते प्रतिबंधित सामान की तस्करी में शामिल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये तस्करी आइशर डीसीएम वाहन (DCM Vehicle) और एक एस्कॉर्ट एर्टिगा कार के जरिए की जा रही थी। दो मुख्य आरोपी – महाराष्ट्र का एक रिसीवर और ओडिशा का एक सप्लायर – फरार हैं।

400 किलोग्राम प्रतिबंधित माल जब्त

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ओडिशा के मलकानगिरी से गांजा लाने के लिए डीसीएम वाहन में खाली सब्जी के प्लास्टिक ट्रे के नीचे पैकेट छिपाए थे। विशिष्ट सूचना के आधार पर, एसओटी और पठानचेरुवु पुलिस ने सोमवार सुबह ओआरआर पर वाहनों को रोका और 400 किलोग्राम सूखा गांजा, एक डीसीएम वाहन, एक एर्टिगा कार और छह मोबाइल फोन जब्त किए। गिरफ्तार आरोपी महाराष्ट्र के सोलापुर और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि अवैध नशीले पदार्थों के व्यापार में भारी मुनाफे के कारण यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था। यह अभियान साइबरबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जिनमें डीसीपी एसओटी पी. शोबन कुमार और अतिरिक्त डीसीपी ए. विश्व प्रसाद शामिल थे, की देखरेख में चलाया गया।

साइबरबाद पुलिस आयुक्त ने आरोपियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार करने के लिए टीमों की सराहना की। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे ड्रग तस्करी से संबंधित जानकारी डायल 100 या साइबराबाद एनडीपीएस प्रवर्तन सेल की हेल्पलाइन के माध्यम से साझा करें और सूचना देने वालों की गोपनीयता का आश्वासन दिया है।

गांजा तस्करी में कितने साल की सजा होती है?

भारत में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में सजा मात्रा और परिस्थितियों पर निर्भर करती है। Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 के तहत कम मात्रा, व्यावसायिक मात्रा और बड़े नेटवर्क से जुड़े मामलों में अलग-अलग दंड निर्धारित हैं। गंभीर मामलों में कई वर्षों की कैद और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। व्यावसायिक स्तर की तस्करी में सजा काफी कठोर मानी जाती है। अदालत मामले के सबूत, मात्रा और आरोपी की भूमिका के आधार पर निर्णय देती है।

भारत में तस्करी की सजा क्या है?

अवैध वस्तुओं, मादक पदार्थों, हथियारों या मानव तस्करी जैसे अपराधों में अलग-अलग कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार जुर्माना, कारावास या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। कुछ मामलों में लंबी जेल सजा का प्रावधान भी होता है। सीमा पार अवैध व्यापार और संगठित अपराधों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जाता है। अदालत उपलब्ध सबूतों और कानून के अनुसार सजा तय करती है।

गांजा पीने पर कौन सी धारा लगती है?

मादक पदार्थों के सेवन और कब्जे से जुड़े मामलों में कार्रवाई मुख्य रूप से Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 के प्रावधानों के तहत की जाती है। अलग-अलग परिस्थितियों में विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास प्रतिबंधित मात्रा में पदार्थ पाया जाता है या सेवन साबित होता है, तो पुलिस संबंधित कानूनी धाराओं के अनुसार मामला दर्ज कर सकती है। सजा और कार्रवाई मात्रा, उद्देश्य और मामले की स्थिति पर निर्भर करती है। कानूनी सलाह के लिए योग्य वकील से संपर्क करना उचित माना जाता है।

भारत में गांजा कब बैन हुआ था?

देश में मादक पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 1985 में Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 लागू किया गया था। इसी कानून के बाद गांजा और अन्य कई नशीले पदार्थों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर कड़े नियम लागू किए गए। इसका उद्देश्य नशे के अवैध व्यापार और दुरुपयोग को रोकना था। हालांकि कुछ पारंपरिक और औषधीय उपयोगों के लिए अलग नियम भी मौजूद हैं। कानून के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान रखा गया है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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