हैदराबाद। चंद्रायनगुट्टा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बोया नागेश के नेतृत्व में फलकनुमा बस डिपो (bus depot) में आरटीसी कर्मियों के साथ उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार द्वारा आरटीसी कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के फैसले का स्वागत किया गया। नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार ने पहली बार आरटीसी कर्मियों के परिवारों के साथ खड़े रहने का भरोसा देते हुए उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। इनमें 11 प्रतिशत वेतन पुनरीक्षण, आरटीसी के सरकारी तंत्र में विलय की प्रक्रिया के लिए समिति गठन तथा मान्यता प्राप्त (Recognized) कर्मचारी संघों के चुनाव कराने का निर्णय शामिल है। इन प्रस्तावों को बीती रात लगभग तीन बजे स्वीकृति दी गई।

आरटीसी कर्मियों के साथ मिलकर मनाई गईं खुशियां
इस अवसर पर नेताओं ने इन निर्णयों का श्रेय मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री , परिवहन मंत्री तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ को दिया। कार्यक्रम के दौरान आरटीसी कर्मियों के साथ मिलकर खुशियां मनाई गईं, दुग्धाभिषेक किया गया और कर्मचारियों को मिठाइयां बांटी गईं। इस मौके पर डिपो प्रबंधक रमेश, डिपो प्रशासन तथा कांग्रेस पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बोया नागेश ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे फैसले भविष्य में भी जारी रहेंगे।
कांग्रेस दिवस कब मनाया जाता है?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्थापना दिवस हर वर्ष 28 दिसंबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1885 में Indian National Congress की स्थापना हुई थी। इस अवसर पर संगठन के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका और प्रमुख नेताओं के योगदान को याद किया जाता है। देशभर में विभिन्न कार्यक्रम, सभाएं और श्रद्धांजलि आयोजन किए जाते हैं।
1910 में इलाहाबाद अधिवेशन का क्या महत्व था?
उस समय कांग्रेस के अधिवेशनों ने राष्ट्रीय जागरण और राजनीतिक चेतना को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। इलाहाबाद में हुए अधिवेशन ने स्वशासन, राजनीतिक अधिकारों और ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनमत को मजबूत करने में योगदान दिया। इस दौर में कांग्रेस धीरे-धीरे अधिक संगठित राजनीतिक शक्ति बन रही थी। ऐसे अधिवेशन नेताओं और जनता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम थे।
कांग्रेस ने स्वतंत्रता दिवस कब मनाया था?
पूर्ण स्वराज के संकल्प के बाद Indian National Congress ने 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया था। लाहौर अधिवेशन (1929) में यह निर्णय लिया गया था कि भारत पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करेगा। इसके बाद देशभर में लोगों ने 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया। बाद में 15 अगस्त 1947 को भारत को वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त हुई।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :