हैदराबाद। कालापत्थर एवं कमाटीपुरा (Kamatipura) पुलिस थानों की सीमा में राउडी शीटरों तथा उनके परिवारजनों के लिए एक व्यापक परामर्श एवं कल्याण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राजेंद्रनगर जोन, हैदराबाद के डीसीपी श्रीनिवास के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान डीसीपी ने संबंधित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संवाद करते हुए अनुशासित, विधिसम्मत एवं शांतिपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने उन्हें आपराधिक गतिविधियों (criminal activities) से स्थायी रूप से दूर रहकर मुख्यधारा के समाज में पुनः सम्मिलित होने की सलाह दी।
पुलिस विभाग उनके पुनर्वास की प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताओं में पुनर्वास सहयोग: डीसीपी ने परिवारों को आश्वस्त किया कि पुलिस विभाग उनके पुनर्वास की प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। 19 राउडी शीटरों के परिवारों को कल्याण सहायता के रूप में राशन किट वितरित की गईं। अगली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए इच्छुक बच्चों को आवासीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाने में सहयोग करने का आश्वासन दिया गया। परिवारों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। इस कार्यक्रम में एसीपी फलकनुमा डिवीजन एम.ए. जावेद, इंस्पेक्टर कालापत्थर खलील पाशा, डीआई कालापत्थर सत्यम, डीआई कमाटीपुरा सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
परामर्श क्या है?
परामर्श (Counselling) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षित परामर्शदाता किसी व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत, शैक्षिक, पारिवारिक या मानसिक समस्याओं को समझने और समाधान खोजने में सहायता करता है। इसमें संवाद, विश्वास और गोपनीयता का विशेष महत्व होता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को आत्म-समझ, निर्णय क्षमता और भावनात्मक संतुलन विकसित करने में मदद देना है, ताकि वह अपने जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सके।
परामर्श के 7 सिद्धांत क्या हैं?
परामर्श के प्रमुख सात सिद्धांत इस प्रकार माने जाते हैं—
- स्वीकार्यता (Acceptance) – व्यक्ति को जैसा है वैसा स्वीकार करना।
- गोपनीयता (Confidentiality) – साझा की गई जानकारी को सुरक्षित रखना।
- सहानुभूति (Empathy) – उसकी भावनाओं को समझना।
- निष्पक्षता (Non-judgmental attitude) – निर्णयात्मक रवैया न रखना।
- व्यक्तिगत भिन्नता (Individual difference) – हर व्यक्ति को अलग समझना।
- स्वायत्तता (Autonomy) – निर्णय लेने की स्वतंत्रता देना।
- सक्रिय सहभागिता (Active participation) – संवाद में सक्रिय सहयोग।
परामर्श के 4 सिद्धांत क्या हैं?
चार मुख्य सिद्धांत सामान्यतः इस प्रकार बताए जाते हैं—
- गोपनीयता – परामर्श की जानकारी सुरक्षित रखी जाए।
- स्वीकार्यता – क्लाइंट को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाए।
- सहानुभूति – उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास किया जाए।
- निष्पक्षता – किसी प्रकार का पूर्वाग्रह या आलोचना न हो।
ये सिद्धांत परामर्श प्रक्रिया को प्रभावी और विश्वासपूर्ण बनाते हैं।
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