विशेषज्ञों और किसानों ने साझा किए सुझाव
हैदराबाद। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) में गुरुवार को प्रस्तावित “भारत मृदा स्वास्थ्य नीति” पर एक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, किसानों, गैर सरकारी संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भाग लेकर टिकाऊ मृदा प्रबंधन रणनीतियों पर चर्चा की। इस पहल का उद्देश्य देश की मृदा स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाना है, ताकि मिट्टी (Soil) को खाद्य सुरक्षा, जलवायु संरक्षण, किसानों की आजीविका और जनस्वास्थ्य से जुड़ी राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में सुरक्षित और संरक्षित किया जा सके।
विभिन्न पक्षों के सुझाव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण मंच
कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकारों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संबंधित क्षेत्रों से लगभग 110 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर डॉ. वी.के. सिंह ने कहा कि यह परामर्श बैठक किसानों के हित में मृदा स्वास्थ्य नीति तैयार करने के लिए विभिन्न पक्षों के सुझाव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण मंच है। वहीं, डॉ. ए.के. नायक ने जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सरल और व्यवहारिक ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला के दौरान मृदा स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, प्रोत्साहन योजनाओं, नीति संबंधी अपेक्षाओं और वर्तमान योजनाओं के समन्वय जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
फाउंडेशन के सहयोग से किया गया आयोजित
यह कार्यक्रम ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज और डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आईसीएआर-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल के निदेशक डॉ. एम. मोहंती, पूर्व कुलपति डॉ. बी. वेंकटेश्वरलु, डॉ. ए.के. सिंह, डॉ. बी.एस. द्विवेदी तथा श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. राजी रेड्डी सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान वन क्षेत्र में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से संबंधित मामला दर्ज न करने और भविष्य के कार्यों में हस्तक्षेप न करने के बदले अधिकारियों ने रिश्वत मांगी।
रकम घटाकर 3.5 लाख रुपये कर दी गई
शुरुआत में 10 लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में बातचीत के बाद रकम घटाकर 3.5 लाख रुपये कर दी गई। एसीबी ने जाल बिछाकर भद्राचलम वन प्रभाग कार्यालय में कार्रवाई की और आरोपी भुक्या कृष्णा से रिश्वत की रकम बरामद की। दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर वारंगल स्थित विशेष एसीबी अदालत में पेश किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है। सुरक्षा कारणों से शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी गई है।
ICAR में क्या काम होता है?
देश में कृषि अनुसंधान और किसानों से जुड़ी नई तकनीकों के विकास का कार्य करता है। यह संस्था खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि शिक्षा से संबंधित शोध करती है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। देशभर में इसके कई कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र संचालित हैं। नई फसल किस्मों और बेहतर उत्पादन तकनीकों पर भी यहां लगातार काम किया जाता है।
ICAR का एग्जाम कौन दे सकता है?
प्रवेश परीक्षा में वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 12वीं कक्षा विज्ञान विषयों के साथ पास की हो। कृषि, बायोटेक्नोलॉजी, पशुपालन और संबंधित विषयों में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्र यह परीक्षा दे सकते हैं। स्नातक, परास्नातक और पीएचडी स्तर पर अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। उम्मीदवारों को निर्धारित आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होती है। परीक्षा के माध्यम से कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिया जाता है।
ICAR की सैलरी कितनी है?
सैलरी पद और अनुभव के अनुसार अलग-अलग होती है। तकनीकी सहायक, वैज्ञानिक, क्लर्क और रिसर्च पदों पर अलग वेतनमान निर्धारित है। शुरुआती स्तर पर कर्मचारियों को लगभग 25 हजार से 60 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिल सकता है। वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी इससे अधिक होती है। इसके अलावा सरकारी भत्ते, यात्रा सुविधा और पेंशन जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। वेतनमान केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार तय किया जाता है।
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