हैदराबाद। राज्य सरकार के मुख्य सचिव के. रामकृष्णाराव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य में डिजिटल फसल सर्वे (DCS) प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। सोमवार को डॉ. बी.आर. अंबेडकर राज्य सचिवालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि विभाग के सलाहकार एवं रिटायर्ड आईएएस राजीव चावला, अग्रिस्टैक के चीफ नॉलेज ऑफिसर (Chief Knowledge Officer) ने की। बैठक में राजस्व सचिव लोकेश कुमार, कृषि सचिव सुरेंद्र मोहन, स्टाम्प्स और रजिस्ट्री विशेष सचिव राजीव गांधी हनमंतू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मार्च 15, 2026 तक डीसीएस प्रक्रिया पूरी करने का कड़ा निर्देश दिया।
10,877 ग्राम पंचायतों में डीसीएस सर्वे शुरू
उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टरों और एनआईसी अधिकारियों के सहयोग से सर्वे को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के 10,877 ग्राम पंचायतों में डीसीएस सर्वे शुरू किया गया है। सीएसएस ने कहा कि यह डिजिटल फसल सर्वे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लागू विभिन्न योजनाओं में सहायक होगा और इसके साथ ही यह राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) गणना में भी उपयोगी साबित होगा। केंद्रीय सरकार के सलाहकार राजीव चावला ने बताया कि देश के यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा जैसे अन्य राज्यों में डिजिटल फसल सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसी प्रकार तेलंगाना में भी इसे जल्द पूरा करने की आवश्यकता है। बैठक में कृषि विभाग संचालक गोपी, राजस्व सचिव लोकेश कुमार, कृषि सचिव सुरेंद्र मोहन, राजीव गांधी हनमंतू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
डिजिटल फसल सर्वे क्या है?
प्रक्रिया के तौर पर डिजिटल फसल सर्वे किसानों की फसलों का ऑनलाइन और तकनीकी माध्यम से किया जाने वाला आकलन है। इसमें मोबाइल ऐप, जीपीएस, सैटेलाइट इमेज और ऑनलाइन डेटा का उपयोग होता है। इसका उद्देश्य यह जानना होता है कि किस खेत में कौन-सी फसल बोई गई है। इससे फसल बीमा, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचता है।
2025 में फसल बीमा कब मिलेगा?
सामान्य नियमों के अनुसार 2025 में फसल बीमा का भुगतान फसल कटाई और नुकसान के आकलन के बाद किया जाता है। खरीफ फसलों का बीमा आमतौर पर जनवरी से मार्च के बीच और रबी फसलों का मई से जुलाई के बीच मिलने की संभावना रहती है। भुगतान की समयसीमा राज्य सरकार, बीमा कंपनी और सर्वे रिपोर्ट पर निर्भर करती है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण क्या है?
तकनीकी दृष्टि से डिजिटल फसल सर्वेक्षण एक आधुनिक प्रणाली है, जिसमें खेतों की जानकारी कागज की बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाती है। इसमें फसल का प्रकार, बोआई की तारीख, क्षेत्रफल और स्थिति का रिकॉर्ड रखा जाता है। इससे गलत दावों पर रोक लगती है और कृषि योजनाओं, फसल बीमा तथा आपदा राहत में पारदर्शिता और तेजी आती है।
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