हैदराबाद। पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. चंद्रकुमार (B. Chandrakumar) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ वर्ग शोषण करने वालों को देशभक्त के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि देश की संपदा की रक्षा करने वालों को ही शोषक करार दिया जा रहा है। वे बंजारा हिल्स स्थित लोटस पॉन्ड के पास रवि नारायण रेड्डी ऑडिटोरियम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
तेलंगाना शहीद स्मारक ट्रस्ट और तेलंगाना अरसम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में दो पुस्तकों का विमोचन किया गया, शतरुणा गीतांजलि, जिसमें प्रो. एस.वी. सत्यनारायण और कांदिमल्ला भारती द्वारा रचित 100 गीतों का संकलन है, तथा सीपीआई के इतिहास में शताब्दी के मील के पत्थर, जिसका संपादन प्रजापक्षम् के संपादक मक्केना सुब्बाराव ने किया है। बैठक की अध्यक्षता कांदिमल्ला प्रताप रेड्डी ने की। न्यायमूर्ति चंद्रकुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से कॉरपोरेट कंपनियां देश को लूट रही हैं और कई राज्यों में बंदरगाहों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) तथा वनों को उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है।
नहीं मिल पाएगा न्यूनतम समर्थन मूल्य
उन्होंने अमेरिका से कपास आयात पर भी चिंता जताई और चेतावनी दी कि आने वाले वर्षों में भारतीय कपास किसानों को प्रति क्विंटल 4,000 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी नहीं मिल पाएगा। उन्होंने विचारधारा आधारित जन आंदोलनों को मजबूत करने का आह्वान किया। सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव पल्ला वेंकट रेड्डी ने सभी कम्युनिस्ट ताकतों से एकजुट होकर, जिसे उन्होंने सांप्रदायिक भाजपा कहा, उसके खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया।
तेलंगाना सशस्त्र किसान आंदोलन भी शामिल
उन्होंने सीपीआई के ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया, जिनमें 3,500 गांवों को मुक्त कराने वाला तेलंगाना सशस्त्र किसान आंदोलन भी शामिल है। पूर्व विधायक चाडा वेंकट रेड्डी ने कहा कि 1925 में स्थापना के बाद से सीपीआई ने कई चुनौतियों के बावजूद अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने पार्टी की यात्रा को दस्तावेज़ीकृत करने के लिए मक्केना सुब्बाराव की सराहना की और कहा कि आज की पीढ़ी को अतीत के बलिदानों की जानकारी दी जानी चाहिए। इस कार्यक्रम में अभिनेता मदाला रवि, निर्देशक बाबजी सहित कई कवि, कलाकार, बुद्धिजीवी और सीपीआई नेता शामिल हुए।
CPI पार्टी का चुनाव चिह्न क्या है?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव चिह्न बाल-हंसिया (हंसिया और बाल) है। यह चिह्न मजदूरों और किसानों के संघर्ष, श्रम और सामाजिक समानता का प्रतीक माना जाता है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कब और क्यों दो भागों में विभाजित हुई?
वर्ष 1964 में पार्टी दो भागों में बंटी। वैचारिक मतभेद, सोवियत संघ और चीन के प्रति अलग-अलग रुख तथा भारत-चीन युद्ध के बाद मतभिन्नताओं के कारण एक धड़ा CPI और दूसरा CPI(M) के रूप में अलग हुआ।
भारत में कितनी कम्युनिस्ट पार्टियां हैं?
भारत में मुख्य रूप से चार प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियां मानी जाती हैं—CPI, CPI(M), CPI(ML) और CPI(ML) लिबरेशन। इनके अलावा कुछ क्षेत्रीय और छोटे वामपंथी दल भी सक्रिय हैं।
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