हैदराबाद। तेलंगाना सरकार (Government of Telangana) द्वारा 4 से 9 मई तक राज्यभर में आयोजित ‘रैतु वारोत्सव’ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गए। कृषि विभाग के साथ उद्यानिकी, रेशम, विद्युत, विपणन, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य एवं सिंचाई विभागों के समन्वय से किसानों को आधुनिक खेती, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, विपणन, यंत्रीकरण, पशुपालन तथा सिंचाई संबंधी विषयों पर व्यापक जागरूकता प्रदान की गई। कार्यक्रमों का शुभारंभ 4 मई को विकाराबाद जिले के तांडूर में राज्य के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने किया।
इस अवसर पर जैविक किसानों (Organic farmers) की उपज की बिक्री के लिए विकसित ‘टीजी ऑर्गेनिक्स’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ भी किया गया। राज्यभर में आयोजित किसान सप्ताह कार्यक्रमों में 2,22,762 किसानों, 5,850 अधिकारियों तथा 8,157 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान 14,565 मिट्टी नमूने एकत्र किए गए तथा 20,734 मृदा विश्लेषण रिपोर्ट किसानों को वितरित की गईं।
वैभवपूर्ण ढंग से संपन्न हुए ‘रैतु वारोत्सव’
किसानों को नैनो उर्वरकों, प्राकृतिक खेती तथा महीन धान की खेती के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बाजार में अधिक मांग वाली धान की किस्मों बीपीटी-5204, आरएनआर-15048, एचएमटी, जयराम, केएनएम-1638, डब्ल्यूजीएल-44, डब्ल्यूजीएल-962 तथा जेजेएल-1798 की खेती करने की सलाह दी। 5 मई को हनुमकोंडा में मंत्रियों पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी और कोंडा सुरेखा की उपस्थिति में मेगा किसान मेले का आयोजन किया गया। 6 मई को किसानों को फसल ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड तथा सहकारी समितियों की सेवाओं पर प्रशिक्षण दिया गया।
7 मई को आधुनिक कृषि यंत्रों तथा ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया गया। राज्यभर में 1,344 कृषि यंत्र प्रदर्शित किए गए और 370 किसानों से कृषि यंत्रों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। साथ ही पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना एवं सब्सिडी संबंधी जानकारी भी दी गई। कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि सरकार किसानों द्वारा उत्पादित धान, मक्का और ज्वार की खरीद करेगी तथा किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
फसलों पर सरकार सब्सिडी प्रदान कर रही
उन्होंने कहा कि ऑयल पाम जैसी अधिक आय देने वाली फसलों पर सरकार सब्सिडी प्रदान कर रही है और उसकी खरीद भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने किसानों को दलहन, सब्जियां और फूलों की खेती अपनाकर अधिक आय अर्जित करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों और बीजों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु व्यापक योजना बनाई गई है। इस अवसर पर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित प्रदर्शनी स्टॉल भी लगाए गए।
कार्यक्रम में सांसद काव्या, विधायक श्रीहरि, कृषि विभाग के सचिव के. सुरेंद्र मोहन, कृषि निदेशक डॉ. बी. गोपी सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। ‘रैतु वारोत्सव’ के पांचवें दिन पशुपालन विभाग की ओर से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्यभर में 593 कृत्रिम गर्भाधान शिविर लगाए गए तथा 35,336 पशुओं की स्वास्थ्य जांच की गई। इसके अतिरिक्त 2,654 किसानों को हरे चारे के बीज वितरित किए गए। मत्स्य विभाग ने मछली उत्पादन बढ़ाने तथा तालाब प्रबंधन पर किसानों को जानकारी दी।
फसल योजना बनाने पर भी मार्गदर्शन
गर्मियों में पशुओं की देखभाल, हरे चारे की खेती तथा जल उपलब्धता के अनुसार फसल योजना बनाने पर भी मार्गदर्शन दिया गया। सिंचाई विभाग ने नहरों की मरम्मत, तालाबों की सफाई और गाद हटाने के महत्व पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए। किसानों को बताया गया कि तालाबों की काली मिट्टी का उपयोग भूमि की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होता है। 9 मई को संतुलित जल उपयोग तथा तालाबों की स्वच्छता संबंधी कार्यक्रमों के साथ किसान सप्ताह समारोह संपन्न हुआ। कृषि निदेशक डॉ. बी. गोपी ने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराकर कृषि विकास को मजबूती दी जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि किसान कल्याण के जरिए तेलंगाना का कृषि क्षेत्र और अधिक सशक्त बनेगा।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
राज्य की कुल जनसंख्या में लगभग 85 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां हिंदू समुदाय सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख और अन्य धर्मों के लोग भी निवास करते हैं। हैदराबाद समेत कई शहरों में धार्मिक विविधता साफ दिखाई देती है। बोनालू, बथुकम्मा और दशहरा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। मंदिरों और सांस्कृतिक परंपराओं का यहां के सामाजिक जीवन में विशेष महत्व माना जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी धार्मिक आस्था काफी मजबूत है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
चावल यहां के लोगों का प्रमुख भोजन माना जाता है और इसे दाल, सांभर तथा सब्जियों के साथ खाया जाता है। मसालेदार स्वाद वाले व्यंजन इस क्षेत्र की खास पहचान हैं। हैदराबादी बिरयानी देशभर में प्रसिद्ध है और पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है। इसके अलावा सरवा पिंडी, जोन्ना रोट्टे, सकिनालु और पचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन भी लोकप्रिय हैं। खाने में लाल मिर्च, इमली और देसी मसालों का अधिक उपयोग किया जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों की पसंद बना हुआ है।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र को “त्रिलिंग देश” कहा जाता था। माना जाता है कि यह नाम तीन प्रमुख शिव मंदिरों — कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम — से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यही शब्द बदलकर वर्तमान नाम बना। दक्षिण भारत की संस्कृति, भाषा और परंपराओं में इस क्षेत्र की अलग पहचान रही है। वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर इसे नया राज्य बनाया गया। आईटी उद्योग, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक उत्सवों के कारण यह देश के महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री किस जाति से हैं?
A. Revanth Reddy रेड्डी समुदाय से संबंध रखते हैं। दक्षिण भारत में यह समुदाय सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। लंबे समय से कई प्रमुख नेता इसी समाज से जुड़े रहे हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और बाद में राज्य स्तर पर बड़ी पहचान बनाई। वर्ष 2023 में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। तेज भाषण शैली और सक्रिय राजनीतिक रणनीति के कारण उनकी पहचान राज्य के प्रमुख नेताओं में की जाती है।
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