तिरुपति। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी सीएच वेंकैया चौधरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गो संरक्षण एक पवित्र सेवा है और प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान में सहभागी बनना चाहिए। रविवार को उन्होंने यह बात उस अवसर पर कही, जब टीटीडी बोर्ड सदस्य ज्योथुला नेहरू, नेहरू फाउंडेशन तथा श्रीनिवास सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष टी. सत्यनारायण के नेतृत्व में 180 लोरियों के माध्यम से लगभग 1600 टन सूखा चारा तिरुपति (Tirupati) स्थित एसवी गोशाला को दान किया गया। अतिरिक्त ईओ ने कहा कि काकीनाडा जिले के जग्गमपेटा क्षेत्र से चारा एकत्र कर परिवहन सहित अन्य खर्च वहन करते हुए पहली बार इतने बड़े स्तर पर दान करना सराहनीय पहल है।
गो संरक्षण और डेयरी विकास से जुड़ी सेवा गतिविधियां समाज के लिए प्रेरणास्रोत
उन्होंने कहा कि गो संरक्षण और डेयरी विकास से जुड़ी सेवा गतिविधियां समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने बताया कि दान में प्राप्त चारा तिरुपति, तिरुमला, पालमनेरु और बाकरापेटा के निकट कमलय्यागारिपल्ली स्थित टीटीडी गोशालाओं में उपयोग किया जाएगा। वर्तमान में इन गोशालाओं में कुल 2974 गायें, बैल और बछड़ों का पालन किया जा रहा है। ज्योथुला नेहरू ने बताया कि पिछले वर्ष 38 लोरियों में चारा दान किया गया था, जबकि इस वर्ष 180 लोरियां उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने जग्गमपेटा के किसानों का निःशुल्क चारा दान करने के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने एसवी गोशाला को दो गायें और एक बछड़ा भी दान किया। कार्यक्रम में टीटीडी बोर्ड सदस्य पनाबाका लक्ष्मी, जानकी देवी, जी. भानु प्रकाश रेड्डी, एन. सदाशिव राव, शांता राम, दर्शन, एसवी गोशाला के निदेशक डॉ. एवीएन शिवकुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
गौ संरक्षण क्या है?
भारतीय संस्कृति में गाय को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण उसकी सुरक्षा, देखभाल और पालन-पोषण से जुड़े प्रयासों को संरक्षण कहा जाता है। इसमें घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं की सेवा, उचित भोजन, चिकित्सा और आश्रय की व्यवस्था शामिल होती है। कई राज्यों में गोशालाएं संचालित की जाती हैं, जहां गायों की देखभाल की जाती है। खेती और दुग्ध उत्पादन में भी इन पशुओं की अहम भूमिका रहती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक जीवनशैली में इनका विशेष स्थान माना जाता है।
1 cow 1 दिन में कितना भूसा खाती है?
एक सामान्य गाय प्रतिदिन लगभग 8 से 12 किलो सूखा चारा या भूसा खा सकती है। मात्रा पशु की उम्र, वजन, नस्ल और दूध देने की क्षमता पर निर्भर करती है। यदि पशु अधिक दूध देता है तो उसे अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। भूसे के साथ हरा चारा, दाना और पर्याप्त पानी देना भी जरूरी माना जाता है। संतुलित आहार मिलने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होती है। पशुपालक आमतौर पर मौसम और जरूरत के अनुसार भोजन की मात्रा तय करते हैं।
गौ संरक्षण योजना क्या है?
कई राज्य सरकारों द्वारा बेसहारा और कमजोर पशुओं की देखभाल के लिए विशेष योजनाएं चलाई जाती हैं। इन योजनाओं के तहत गोशालाओं को आर्थिक सहायता, चारे की व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उद्देश्य सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को सुरक्षित आश्रय देना और उनकी संख्या को नियंत्रित करना होता है। कुछ योजनाओं में पशुपालकों को भी अनुदान दिया जाता है ताकि वे पशुओं की बेहतर देखभाल कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे रोजगार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद की जाती है।
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