Hyderabad : एनटीआर ट्रस्ट द्वारा नेकलेस रोड पर थैलेसीमिया रन का आयोजन

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थैलेसीमिया
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हैदराबाद। एनटीआर मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित बच्चों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज शहर के नेकलेस रोड पर भव्य “एनटीआर ट्रस्ट थैलेसीमिया रन” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जलविहार से प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और आम नागरिकों ने 3 के, 5के और 10 के श्रेणियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर एनटीआर मेमोरियल ट्रस्ट की प्रबंध न्यासी नारा भुवनेश्वरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में थैलेसीमिया रोग (Thalassemia) के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि यह एक गंभीर बीमारी है, जिससे पीड़ित बच्चों को हर 15 दिन में कष्टदायक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

12,000 बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि देश में हर वर्ष लगभग 12,000 बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं, जबकि वर्तमान में देशभर में 1.5 लाख से अधिक मरीज इस बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केवल तेलुगु राज्यों में ही लगभग 7,500 लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि इस रन का मुख्य उद्देश्य समाज में थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा और अनंतपुर जिलों में शीघ्र ही थैलेसीमिया केंद्र और ब्लड बैंक स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि एनटीआर ट्रस्ट का लक्ष्य इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना है।

अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने लिया भाग

इस कार्यक्रम में पूर्व भारतीय महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज, विधायक मल्ला रेड्डी, हैदराबाद पुलिस आयुक्त सीवी आनंद, हैदराबाद कलेक्टर प्रियंका आला, साइबराबाद सीपी रवींद्र राणे, भारत बायोटेक की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एला, फिल्म अभिनेत्री और मिस वर्ल्ड मानसा वाराणसी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में फिल्मी, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों तथा बड़ी संख्या में युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के समर्थन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

थैलेसीमिया बीमारी से क्या होता है?

यह एक आनुवंशिक रक्त संबंधी रोग है जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन का निर्माण सही तरह से नहीं हो पाता। इससे खून की कमी हो जाती है और व्यक्ति को बार-बार कमजोरी, थकान, चक्कर आना और सांस फूलने जैसी समस्याएं होती हैं। कई मामलों में नियमित रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। बच्चों में विकास धीमा हो सकता है और रोगी की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है। समय पर इलाज जरूरी माना जाता है।

थैलेसीमिया का मरीज कब तक जीवित रह सकता है?

जीवन अवधि उपचार की स्थिति, रोग के प्रकार और नियमित रक्त चढ़ाने की सुविधा पर निर्भर करती है। सही देखभाल मिलने पर कई मरीज वयस्क अवस्था तक या उससे अधिक भी जी सकते हैं। गंभीर मामलों में बिना इलाज के जीवन कम हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा, नियमित जांच और आयरन नियंत्रण से जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट कुछ मरीजों के लिए स्थायी समाधान भी बन सकता है। माना जाता है कि

थैलेसीमिया रोग से कौन सा अंग प्रभावित होता है?

इस रोग में मुख्य रूप से शरीर की रक्त निर्माण प्रणाली प्रभावित होती है, विशेषकर अस्थि मज्जा। यह हीमोग्लोबिन बनाने की प्रक्रिया को कमजोर कर देती है, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। इसके कारण शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति घट जाती है। लंबे समय तक प्रभाव रहने पर हृदय और यकृत पर भी दबाव बढ़ सकता है। समय पर इलाज आवश्यक माना जाता है। बहुत जरूरी होता है

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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