उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन में बोले डॉ. एंजेला लुसिगी
संगारेड्डी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रेजिडेंट प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी ने गुरुवार को पटनचेरु में अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) में आयोजित एक उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन के दौरान कहा कि जैव विविधता का संरक्षण ही अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रणालियों और भविष्य को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है।
हमें एकजुट होना चाहिए
डॉ. लुसिगी ने कहा कि भारत ने कृषि क्षेत्र में जैवविविधता-नकारात्मक सब्सिडी से जैवविविधता-सकारात्मक या तटस्थ निवेश की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘इस बदलाव को गति देने के लिए हमें मजबूत भागीदारी के माध्यम से एकजुट होना चाहिए,’ उन्होंने सभी हितधारकों से प्रकृति-सकारात्मक समाधानों को आगे बढ़ाने में मिलकर काम करने का आह्वान किया।
गोलमेल सम्मेलन में हुई विस्तृत चर्चा
‘जैव विविधता की सुरक्षा के लिए कृषि में सार्वजनिक नीतियों और कार्यक्रमों का पुन: प्रयोजन’ विषय पर आयोजित इस गोलमेज सम्मेलन का आयोजन भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर) और यूएनडीपी की जैव विविधता वित्त पहल (बीआईओएफआईएन) ने आईसीआरआईएसएटी के सहयोग से संयुक्त रूप से किया था।
डॉ. पाठक ने कही यह बात
आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कृषि जैव विविधता को संरक्षित करने में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला, खास तौर पर सीजीआईएआर के 11 अंतरराष्ट्रीय जीन बैंकों के माध्यम से। उन्होंने कहा कि आज कृषि की भूमिका खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने से कहीं आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा को भी शामिल करना चाहिए।
इस सभा को ऐतिहासिक गोलमेज बताते हुए राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष सी अचलेंद्र रेड्डी, आईएफएस (सेवानिवृत्त) ने जैवविविधता के मुद्दों पर राजनीतिक नेताओं और नीति निर्माताओं को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यधारा में लाने में प्रस्तुत की भारत की प्रगति
उन्होंने जैवविविधता को मुख्यधारा में लाने में भारत की प्रगति प्रस्तुत की, और बताया कि भारत कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैवविविधता रूपरेखा पर हस्ताक्षर करने वाले 46 देशों में से एक है। रेड्डी ने कहा कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य तैयार किए हैं और तेलंगाना देश का पहला राज्य है, जिसने नए वैश्विक ढांचे के अनुरूप राज्य जैव विविधता कार्य योजना विकसित की है।