हैदराबाद। एंडोमेंट्स विभाग की प्रधान सचिव शैलजा रामअय्यर, आयुक्त एन. हनुमंता राव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को लोक भवन में राज्यपाल (Governor) शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात कर आगामी सरस्वती अंत्य पुष्करालु में शामिल होने का निमंत्रण दिया। बैठक के दौरान अधिकारियों ने राज्यपाल को गोदावरी पुष्करालु (26 जून से 7 जुलाई 2027) और सरस्वती अंत्य पुष्करालु (Pushkaralu) (21 मई से 1 जून 2026) की तैयारियों पर विस्तृत पावरपॉइंट प्रस्तुति दी।
राज्य सरकार पुष्करालु के सुचारू आयोजन के लिए कर रही है व्यापक व्यवस्थाएं
प्रधान सचिव शैलजा रामैय्यर ने बताया कि राज्य सरकार पुष्करालु के सुचारू आयोजन के लिए व्यापक व्यवस्थाएं कर रही है। राज्यपाल ने बैठक में श्रद्धालुओं के लिए आवास सुविधाएं, भीड़ प्रबंधन, प्रमुख मंदिरों का महत्व और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर जानकारी ली। इस अवसर पर राज्यपाल के विशेष मुख्य सचिव एम. दाना किशोर भी उपस्थित थे। इसी बीच, अचंपेट के विधायक डॉ. वामसी कृष्ण ने भी अन्य लोगों के साथ राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट की। वहीं, लेफ्टिनेंट जनरल नीरज वाष्णेय, कमांडेंट, एमसीईएमई, सिकंदराबाद ने भी अधिकारियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात की। इस दौरान एमसीईएमई में प्रशिक्षण गतिविधियों और संस्थागत पहलों से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई।
सरस्वती पुष्करालू के क्या फायदे हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार सरस्वती पुष्करालू में पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस अवसर पर पूजा-पाठ, दान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, साथ ही पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी यह पर्व महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरस्वती पुष्करालु महोत्सव किस राज्य में मनाया जाता है?
मुख्य रूप से सरस्वती पुष्करालू तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। यह उत्सव सरस्वती नदी से जुड़े पवित्र स्थलों पर आयोजित होता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होकर स्नान और पूजा करते हैं। इस दौरान घाटों पर विशेष व्यवस्था और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
2025 में सरस्वती पूजा कब है?
वर्ष 2025 में सरस्वती पूजा 2 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन वसंत पंचमी के रूप में भी जाना जाता है, जो विद्या, कला और संगीत की देवी सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन छात्र-छात्राएं और श्रद्धालु विशेष पूजा करते हैं और ज्ञान तथा बुद्धि की कामना करते हैं।
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