Hyderabad : छात्र ने पढ़ाई के लिए मजबूर किए जाने पर कर ली आत्महत्या

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आत्महत्या
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कॉलेज में दाखिला लेने के लिए मजबूर किए जाने से था उदास, आत्महत्या कर दी जान

मंचेरियल। दांडेपल्ली मंडल केंद्र में सोमवार रात एक इंटरमीडिएट छात्र ने आत्महत्या (Suicide) कर ली, कथित तौर पर वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने में रुचि नहीं रखता था और हैदराबाद के एक कॉलेज में दाखिला लेने के लिए मजबूर किए जाने से उदास था। पुलिस ने बताया कि चंद्रा गौड़ के बेटे पोन्नम थारुन गौड़ (18) ने रात करीब 9 बजे अपने घर पर फांसी लगा ली, जब वह घर पर अकेला था। जब उसके माता-पिता ने उसे खाने के लिए बुलाने के लिए उसका कमरा (Room) खोला तो उसे मृत पाया।

पढ़ाई के बजाय व्यवसाय में दिखाई थी रुचि, आत्महत्या से परिवार में कोहराम

पुलिस के पास दायर याचिका में चंद्र गौड़ ने कहा कि थारुन ने पढ़ाई के बजाय व्यवसाय में रुचि दिखाई थी। हैदराबाद के एक इंटरमीडिएट कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद वह काफी परेशान रहने लगा था और अक्सर अपनी मां के प्रति गुस्सा जाहिर करता था। याचिका में कहा गया है कि वह अपने जीवन के मौजूदा रास्ते से उदास और असंतुष्ट था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

छात्रा ने किया आत्महत्या का प्रयास

वनापर्थी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में उस समय अफरातफरी मच गई, जब इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष की छात्रा धरणी ने स्कूल भवन से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना के बाद छात्र और स्टाफ उसे सरकारी अस्पताल ले गए। शुरुआती उपचार के बाद अस्पताल स्टाफ ने स्कूल प्रशासन को उसे बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद के निम्स में भर्ती कराने की सलाह दी। जिले के कृष्णगिरी गांव की मूल निवासी धरणी ने हाल ही में केजीबीवी में प्रथम वर्ष के इंटरमीडिएट कोर्स में दाखिला लिया था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, उसके आत्महत्या के प्रयास के पीछे के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

पूर्व सरपंच ने की आत्महत्या

जगतियाल। गोलापल्ली मंडल के बिबिराजपल्ली गांव में पूर्व सरपंच दसारी शंकरैया ने कथित तौर पर गांव के विकास कार्यों के लिए बढ़ते कर्ज से निपटने में असमर्थ होकर आत्महत्या कर ली। परिवार के सदस्यों ने बताया कि शंकरैया ने सोमवार को आम के बगीचे में कीटनाशक खा लिया। शंकरैया ने पिछले दो सालों में करीब 10 लाख रुपये उधार लेकर गांव में कई विकास कार्य करवाए थे। हालांकि, दो साल बाद भी काम के बिल का भुगतान नहीं किया गया, जिससे साहूकारों का उन पर बहुत दबाव बढ़ गया। रिश्तेदारों ने बताया कि आर्थिक तंगी से जूझने में असमर्थ होकर उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

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