हैदराबाद। केंद्र सरकार द्वारा देशभर में कराई जा रही जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को शामिल कर उनकी गणना किए जाने की मांग को लेकर सरकारी सलाहकार एवं पूर्व सांसद वी. हनुमंत राव ने अपने अंबरपेट स्थित आवास पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया। वी. हनुमंत राव ने कहा कि राजनीतिक दलों से परे होकर पिछड़ा वर्ग के उत्थान और जनसंख्या के आधार पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए जनगणना में ओबीसी की गणना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को पत्र लिखे, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
इस अनशन में विभिन्न नेताओं एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें विधायक, एमएलसी, ओबीसी समिति के पदाधिकारी, पिछड़ा वर्ग संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में कहा गया कि ओबीसी जनसंख्या के वास्तविक आंकड़ों के बिना उनके लिए योजनाएं और आरक्षण आधारित नीतियां प्रभावी रूप से लागू नहीं की जा सकतीं। प्रतिभागियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग की स्पष्ट गणना की जाए। इस मौके पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे और उन्होंने इस मांग के समर्थन में एकजुटता व्यक्त की।
आमरण अनशन का क्या मतलब होता है?
किसी मांग या विरोध को लेकर बिना भोजन किए लगातार उपवास करने को आमरण अनशन कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपनी मांग पूरी होने तक भोजन त्याग देता है। यह अहिंसक विरोध का एक तरीका माना जाता है, जिसका उपयोग सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में किया जाता रहा है।
महात्मा गांधी ने 1932 में आमरण अनशन क्यों किया था?
1932 में Mahatma Gandhi ने ब्रिटिश सरकार द्वारा दलितों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था के विरोध में आमरण अनशन शुरू किया था। उनका मानना था कि इससे समाज में विभाजन बढ़ेगा। बाद में Poona Pact होने के बाद उनका अनशन समाप्त हुआ।
आमरण अनशन क्या था?
यह एक ऐसा शांतिपूर्ण आंदोलन होता है, जिसमें व्यक्ति अपनी मांगों को मनवाने के लिए भोजन का त्याग कर देता है। इतिहास में कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने इसका उपयोग विरोध दर्ज कराने के लिए किया। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी यह तरीका काफी प्रसिद्ध रहा।
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