कलेक्टर व चुनाव सामान्य पर्यवेक्षक ने वितरण केन्द्र का निरीक्षण किया
हैदराबाद। रंगारेड्डी जिले (Rangareddy district) में 11 फरवरी बुधवार, को होने वाले नगर निकाय चुनावों के मद्देनज़र सभी चुनाव अधिकारियों को अत्यंत सतर्कता के साथ ड्यूटी निभानी चाहिए और किसी भी प्रकार की छोटी-सी भी चूक न हो, ऐसा निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी (District Election Officer) एवं कलेक्टर सी. नारायण रेड्डी तथा चुनाव सामान्य पर्यवेक्षक मयंक मित्तल ने दिया। मंगलवार को चुनाव सामान्य पर्यवेक्षक मयंक मित्तल ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर श्री सी. नारायण रेड्डी के साथ मिलकर इब्राहिमपट्टनम नगर पालिका से संबंधित श्री इंदु इंजीनियरिंग कॉलेज में स्थापित मतदान सामाग्री वितरण केन्द्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मतदान अधिकारियों को दिए जा रहे चुनाव सामग्री वितरण की प्रक्रिया की समीक्षा की।
मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा
इस अवसर पर सामान्य पर्यवेक्षक मयंक मित्तल ने कहा कि मतदान ड्यूटी पर तैनात प्रत्येक अधिकारी को चेकलिस्ट के अनुसार चुनाव सामग्री की पूरी तरह जांच करने के बाद ही वितरण केन्द्र से रवाना होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जिम्मेदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा तथा निर्धारित समय से पहले मतदान केंद्र में प्रवेश कर चुके मतदाताओं को 5 बजे के बाद भी मतदान करने की अनुमति दी जाएगी। जिला कलेक्टर सी. नारायण रेड्डी ने कहा कि प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए आवश्यक सामग्री को अलग-अलग तैयार रखा जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव सामग्री वितरण व्यवस्था की जानकारी ली और निर्देश दिया कि किसी भी प्रकार की कमी या अव्यवस्था न हो। चेकलिस्ट के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध है या नहीं।
मतदान कर्मियों को ले जाने के लिए तैयार वाहनों का किया निरीक्षण
उन्होंने मतदान कर्मियों को ले जाने के लिए तैयार वाहनों का निरीक्षण किया और समय पर कर्मचारियों को उनके निर्धारित मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए सभी को समर्पण भाव से कार्य करना चाहिए। कहीं भी पुनर्मतदान की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मतदान के दौरान मतदाताओं की गोपनीयता बनाए रखने पर भी जोर दिया। बैलेट पेपर, मतदान पेटियों और अन्य चुनाव सामग्री का निरीक्षण करते हुए बैलेट पेपर को सावधानीपूर्वक जांच कर पैक करने के निर्देश दिए।

कड़ी सुरक्षा के बीच बैलेट बॉक्सों को स्ट्रांग रूम में स्थानांतरित करने के निर्देश
मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच बैलेट बॉक्सों को स्ट्रांग रूम में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद शेरिगुड़ा स्थित मंडल परिषद एवं जिला परिषद विद्यालय में बने मतदान केंद्रों तथा स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया गया। महेश्वरम डीसीपी ने बताया कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर पुलिस बंदोबस्त की व्यवस्था की गई है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण माहौल में चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। इस दौरान इब्राहिमपट्टनम आरडीओ अनंत रेड्डी, इब्राहिमपट्टनम नगर आयुक्त, संबंधित अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कलेक्टर का दूसरा नाम क्या है?
जिला प्रशासन में सर्वोच्च अधिकारी को प्रायः जिलाधिकारी कहा जाता है, जिसे संक्षेप में डीएम भी बोला जाता है। कई राज्यों में यही पद डिप्टी कमिश्नर के नाम से जाना जाता है। राजस्व व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी इसी अधिकारी पर होती है। ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश काल में “कलेक्टर” शब्द प्रचलित हुआ, क्योंकि यह अधिकारी कर संग्रह का प्रमुख होता था, लेकिन आज इसके कार्यक्षेत्र काफी व्यापक हो चुके हैं।
12 वीं के बाद कलेक्टर कैसे बने?
बारहवीं के बाद लक्ष्य तय करके सही दिशा में तैयारी शुरू करनी होती है। स्नातक किसी भी मान्यता प्राप्त विषय से पूरा करना अनिवार्य है। इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा देनी पड़ती है। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार—तीनों चरण सफलतापूर्वक पास करने पर आईएएस कैडर मिलता है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद फील्ड पोस्टिंग के दौरान जिलाधिकारी या कलेक्टर जैसे पद पर नियुक्ति होती है।
कलेक्टर को इंग्लिश में क्या कहा जाता है?
प्रशासनिक भाषा में इस पद के लिए अंग्रेज़ी में District Collector शब्द का प्रयोग होता है। कई राज्यों और दस्तावेज़ों में इसे District Magistrate (DM) भी कहा जाता है, खासकर जब न्यायिक और कार्यपालिक अधिकारों की बात हो। कुछ जगहों पर Deputy Commissioner नाम भी प्रचलित है। पद का नाम अलग हो सकता है, लेकिन जिम्मेदारियाँ लगभग समान रहती हैं—जिले का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण और समन्वय।
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