हैदराबाद। तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू (D. Sridhar Babu) ने एयरोस्पेस, रक्षा तथा अंतरिक्ष क्षेत्रों में निवेश के लिए अमेरिका को आमंत्रित किया है। गुरुवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर तेलंगाना सचिवालय में अमेरिका के राष्ट्रीय युद्ध महाविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उन्होंने यह प्रस्ताव रखा। मंत्री ने कहा कि तेलंगाना इन क्षेत्रों में निवेश के लिए देश के सबसे उभरते केंद्रों में से एक बन चुका है। राज्य में इस क्षेत्र में 30 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच निर्यात (Exports) में 103 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि हुई है।
अमेरिका राष्ट्रीय युद्ध महाविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल मंत्री से मिला
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तेलंगाना को मानव रहित विमान, उनके प्रतिरोधी तंत्र, वायुयान के पुर्जों तथा रक्षा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही साइबर सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपग्रह प्रणालियों तथा उन्नत संचार तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रीधर बाबू ने कहा कि रॉकेट निर्माण से लेकर नवीन पीढ़ी के मानव रहित विमानों, युद्धक विमानों के पुर्जों तथा उपग्रहों तक तेलंगाना की पहचान विश्व स्तर पर तेजी से स्थापित हो रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में अनेक वैश्विक कंपनियों तथा प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों की उपस्थिति इस क्षेत्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त 1500 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो सटीक अभियांत्रिकी, मानव रहित विमान तथा रक्षा उपकरण निर्माण में योगदान दे रहे हैं।

तेलंगाना न केवल निवेश का प्रमुख केंद्र बनने के लिए तैयार
मंत्री ने कहा कि हैदराबाद को विश्व के सर्वाधिक किफायती एयरोस्पेस शहरों में स्थान मिला है तथा तेलंगाना को लगातार पांच वर्षों तक इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य की औद्योगिक स्वीकृति प्रणाली के अंतर्गत 15 से 30 दिनों के भीतर अनुमतियां प्रदान की जा रही हैं तथा कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए विशेष कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है।
श्रीधर बाबू ने कहा कि तेलंगाना न केवल निवेश का प्रमुख केंद्र बनने के लिए तैयार है, बल्कि अमेरिका के साथ प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, विनिर्माण तथा कौशल विकास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर अमेरिकी प्रतिनिधि पॉल नरैन ने कहा कि अमेरिका तेलंगाना जैसे प्रगतिशील राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है और भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। बैठक में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
एयरोस्पेस का मतलब क्या होता है?
विज्ञान और इंजीनियरिंग का वह क्षेत्र जो हवाई जहाज, रॉकेट और अंतरिक्ष यान के डिजाइन, निर्माण और संचालन से जुड़ा होता है, एयरोस्पेस कहलाता है। इसमें वायुमंडल (एरोनॉटिक्स) और अंतरिक्ष (एस्ट्रोनॉटिक्स) दोनों शामिल होते हैं। यह क्षेत्र आधुनिक तकनीक, रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एयरोस्पेस इंजीनियर की सैलरी कितनी होती है?
इस क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियर की सैलरी अनुभव और कंपनी पर निर्भर करती है। शुरुआती स्तर पर लगभग 4 से 8 लाख रुपये सालाना मिल सकते हैं। कुछ अनुभव के बाद यह 10 से 20 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है। बड़ी संस्थाओं जैसे इसरो या निजी कंपनियों में सैलरी और भी अधिक हो सकती है।
भारत में एयरोस्पेस शहर कौन सा है?
भारत में बेंगलुरु को एयरोस्पेस हब माना जाता है। यहां इसरो, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और कई निजी एयरोस्पेस कंपनियां स्थित हैं। इसी कारण यह शहर देश के एयरोस्पेस और टेक्नोलॉजी सेक्टर का प्रमुख केंद्र बन गया है।
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