किसी भी राज्य या क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं
हैदराबाद। भाजपा तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव (N. Ramachandra Rao) ने चंदानगर में मीडिया से बातचीत करते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए 2029 से प्रभावी करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। रामचंद्र राव ने इस निर्णय पर तेलंगाना की महिलाओं और राज्य की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और महिलाओं को शुभकामनाएं दीं।
महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देगा यह निर्णय
उन्होंने कहा कि यह निर्णय महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देगा। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2008 में कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक लाने में असफल रही, क्योंकि उसके सहयोगी दलों ने संसद में इसका विरोध किया था। उस समय कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर सोनिया गांधी, स्पष्ट रुख नहीं अपना सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा किए गए वादे भी पूरे नहीं हो सके। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान में कांग्रेस और इंडी गठबंधन की पार्टियां महिला आरक्षण के खिलाफ माहौल बना रही हैं और नए प्रस्तावों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं।
देश की राजनीति में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
उन्होंने कहा कि यह कानून लागू होने से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए संसद और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिसमें 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। रामचंद्र राव ने कांग्रेस पर गलत प्रचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कानून से किसी भी राज्य या क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि इस तरह के भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला महिलाओं को विधायिकाओं में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।
भारत में महिलाओं को कितना आरक्षण है?
देश में महिलाओं के लिए आरक्षण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग है। पंचायत और नगर निकायों में कम से कम 33% आरक्षण दिया गया है, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। संसद और विधानसभाओं में भी 33% आरक्षण का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किया गया है, जो लागू होने की प्रक्रिया में है।
महिला आरक्षण का 33% आरक्षण क्या है?
इस प्रावधान के तहत महिलाओं के लिए कुल सीटों में से 33% सीटें आरक्षित की जाती हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें निर्णय लेने में समान अवसर देना है। यह व्यवस्था स्थानीय निकायों में पहले से लागू है और अब इसे संसद व विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना बनाई गई है, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ सके।
महिला आरक्षण का इतिहास क्या है?
महिलाओं के आरक्षण की शुरुआत 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन से हुई, जब पंचायत और नगर निकायों में 33% आरक्षण दिया गया। यह प्रावधान भारतीय संविधान में जोड़ा गया। इसके बाद लंबे समय तक संसद में आरक्षण की मांग चलती रही और अंततः 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया।
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