Telangana : सभी केंद्रीय कारागारों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं – डॉ. सौम्या मिश्रा

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प्रशिक्षु एएसपी एवं डीएसपी का केंद्रीय कारागार चेरलापल्ली का दौरा

हैदराबाद। नेशनल पुलिस अकादमी के आरआर 77वें बैच के प्रशिक्षु एएसपी (ASP) तथा आरबीवीआरआर तेलंगाना पुलिस अकादमी के 102 ग्रुप-1 प्रशिक्षु अधिकारी (उप पुलिस अधीक्षक) ने अपने फील्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत केंद्रीय कारागार चेरलापल्ली का दौरा किया। प्रिजन एवं सुधार सेवा की महानिदेशक डॉ. सौम्या मिश्रा ने प्रशिक्षु अधिकारियों को जेल प्रशासन एवं बंदियों के सुधार के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जेलों में “निवृत्ति” पहल के तहत सभी केंद्रीय कारागारों एवं महिला विशेष कारागारों में नशामुक्ति केंद्र (Centre) स्थापित किए जा रहे हैं, जो देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है।

अब जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं रह गई

उन्होंने कहा कि अब जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं रह गई हैं, बल्कि इन्हें सुधारात्मक संस्थानों में परिवर्तित किया गया है, जहाँ बंदियों को समाज में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में पुनः स्थापित करने पर जोर दिया जाता है। उन्होंने विभाग के मूल मंत्र “कस्टडी विद केयर” तथा “ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स” को भी दोहराया। कारागार विभाग के कार्य, प्रशासन, कल्याणकारी गतिविधियों एवं नई पहलों पर एक विस्तृत प्रस्तुति निरीक्षक जनरल ऑफ प्रिजन्स एन. मुरली बाबू द्वारा दी गई। दौरे के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को जेल के विभिन्न अनुभागों का भ्रमण कराया गया, जिसमें संजीवनी (जेल अस्पताल), जेल उद्योग इकाइयाँ, अन्नपूर्णा (कैदियों की रसोई), पुस्तकालय एवं बैरक शामिल थे।

कैदियों की कृषि कॉलोनी का भी किया निरीक्षण

इसके अलावा उन्होंने चेरलापल्ली स्थित कैदियों की कृषि कॉलोनी का भी निरीक्षण किया, जहाँ पोल्ट्री, डेयरी, मत्स्य पालन, कृषि एवं अन्य गतिविधियों का संचालन कैदियों द्वारा किया जाता है। दौरे के बाद पीएसी चेरलापल्ली में एक डिब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रशिक्षुओं के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए और उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने इस दौरे को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों में निरीक्षक जनरल ऑफ प्रिजन्स एस. मुरली बाबू, उप निरीक्षक जनरल डी. श्रीनिवास, केंद्रीय कारागार चेरलापल्ली के अधीक्षक जी. प्रमोद, कृषि कॉलोनी के अधीक्षक डी. भरत, उप पुलिस अधीक्षक सतीश कुमार एवं सी. देवा रेड्डी उपस्थित थे।

नशामुक्ति का क्या अर्थ है?

किसी व्यक्ति द्वारा शराब, तंबाकू या अन्य मादक पदार्थों की लत को छोड़कर स्वस्थ और सामान्य जीवन की ओर लौटने की प्रक्रिया को नशामुक्ति कहा जाता है। इसमें शारीरिक उपचार, मानसिक परामर्श और सामाजिक समर्थन शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य व्यक्ति को नशे की निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भर और संतुलित जीवन जीने में मदद करना होता है।

नशा मुक्ति दवा का नाम क्या है?

छोड़ने के लिए अलग-अलग प्रकार की दवाएं उपयोग की जाती हैं, जो नशे के प्रकार पर निर्भर करती हैं। जैसे शराब की लत के लिए डिसल्फिराम और नाल्ट्रेक्सोन दी जाती हैं, जबकि धूम्रपान छोड़ने के लिए निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इन दवाओं का सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

नशा मुक्ति केंद्र में कितना पैसा लगता है?

मुक्ति केंद्र का खर्च स्थान, सुविधा और इलाज की अवधि पर निर्भर करता है। सामान्यतः सरकारी केंद्रों में इलाज बहुत कम लागत या मुफ्त होता है, जबकि निजी केंद्रों में यह खर्च लगभग 10,000 रुपये से 1 लाख रुपये प्रति माह या उससे अधिक हो सकता है। इलाज की अवधि, रहने-खाने की व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं के अनुसार कुल खर्च अलग-अलग हो सकता है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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