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Hyderabad : सरस्वती अंत्य पुष्करालु का केशवरम में शुभारंभ, लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 22, 2026 • 12:27 PM
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हैदराबाद। जयशंकर भूपालपल्ली जिले के केशवरम पुष्कर घाट (Keshavaram Pushkar Ghat) पर 12 दिवसीय सरस्वती अंत्य पुष्करालु का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधियों के बीच इस पवित्र उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस धार्मिक आयोजन का औपचारिक उद्घाटन कांची कामकोटि पीठाधिपतिशंकर विजयेन्द्र सरस्वती (Vijayendra Saraswati) ने किया। उन्होंने सुबह 5:43 बजे शुभ मुहूर्त में पवित्र स्नान कर पुष्कर उत्सव की विधिवत शुरुआत की। सरस्वती अंत्य पिरालु में भाग लेने के लिए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला अपनी पत्नी जानकी शुक्ल के साथ हेलीकॉप्टर से कालेश्वरराम पहुंचे। उनके आगमन पर भव्य स्वागत किया गया।

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल अपनी पत्नी जानकी शुक्ला के साथ पहुंचे

इस अवसर पर मंत्री डुडिला श्रीधर बाबू, अंत्येष्टि विभाग की मुख्य सचिव शैलजा रामअय्यर, जिला पार्षद राहुल शर्मा और एसपी संकीर्थ ने राज्यपाल का आगमन पर स्वागत किया। राज्यपाल के आगमन पर सुरक्षा और संवैधानिक मित्रता को लेकर विशेष नियुक्तियाँ की गईं। अधिकारियों ने पॅरालु के आयोजन स्थल पर तारामंडल का भी निरीक्षण किया और कार्यक्रम की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने पर चर्चा की। कार्यक्रम में आईटी एवं उद्योग मंत्रीदुदिल्ला श्रीधर बाबू, देवदाय मंत्री कोंडा सुरेखा, देवदाय आयुक्त हनुमंत राव, जिला कलेक्टर राहुल शर्मा, धार्मिक सलाहकार गोविंदा हरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है – राहुल शर्मा

भूपालपल्ली विधायक गंद्रा सत्यनारायण राव और इब्राहिमपटनम विधायक मल रेड्डी रंगारेड्डी ने भी पवित्र स्नान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सेवाएं, एंबुलेंस और परिवहन सुविधाएं शामिल हैं। जिला कलेक्टर राहुल शर्मा ने बताया कि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। केशवरम मंदिर समिति द्वारा स्नान के बाद मंदिर दर्शन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा नि:शुल्क भोजन (अन्नदान) की व्यवस्था की गई है, जबकि गर्मी से बचाव के लिए अस्थायी शेड और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं।

पापों के नाश और मृत्यु के भय से मुक्ति का प्रतीक

केशवरम मुकतेश्वर स्वामी मंदिर की विशेषता यह है कि यहां एक ही पीठ पर यम (कालेश्वर) और शिव (मुक्तेश्वर) विराजमान हैं। मान्यता है कि भक्त पहले कालेश्वर की पूजा करते हैं और फिर मुक्तेश्वर की आराधना करते हैं। यहां स्थित लिंगम में दो छिद्र हैं, जिनमें अभिषेक का जल अदृश्य रूप से समा जाता है, जो श्रद्धालुओं में आस्था का विषय है। मंदिर में “यम कोनम” नामक संकीर्ण मार्ग से गुजरने की परंपरा भी है, जिसे पापों के नाश और मृत्यु के भय से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। प्रशासन को उम्मीद है कि आगामी दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होंगे, जिससे केशवरम एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन जाएगा।

सरस्वती पुष्करालु क्या है?

सरस्वती पुष्करालु एक धार्मिक पर्व है, जो पवित्र नदियों से जुड़ी आस्था और स्नान परंपरा के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव विशेष ज्योतिषीय योग बनने पर आयोजित किया जाता है। श्रद्धालु नदी में स्नान, पूजा और दान-पुण्य करते हैं। दक्षिण भारत में इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान स्नान और पूजा को शुभ माना जाता है।

भारत में सरस्वती पुष्करलू कहां है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सरस्वती नदी को पवित्र और प्राचीन नदी माना जाता है। सरस्वती पुष्करलू से जुड़े आयोजन हरियाणा, प्रयागराज और अन्य धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जाते हैं, जहां सरस्वती नदी के प्रवाह या संगम से जुड़ी मान्यता है। कई श्रद्धालु त्रिवेणी संगम क्षेत्रों में विशेष पूजा और स्नान करते हैं। अलग-अलग राज्यों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

सरस्वती की अभिव्यक्ति क्या है?

ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की शक्ति को सरस्वती की अभिव्यक्ति माना जाता है। माता सरस्वती को बुद्धि, शिक्षा और रचनात्मकता की देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उन्हें वीणा, पुस्तक और हंस के साथ दर्शाया गया है। विद्यार्थियों, कलाकारों और विद्वानों के बीच उनकी विशेष श्रद्धा मानी जाती है। बसंत पंचमी के अवसर पर विशेष रूप से उनकी पूजा की जाती है।

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