हैदराबाद। तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के मदनूर मंडल के थड़ी हिप्पारगा गांव में बिजली का झटका (Electric shock) लगने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान लक्ष्मण (50 वर्ष) पुत्र नागुराव के रूप में हुई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार लक्ष्मण बिजली विभाग (Electricity Department) के लाइनमैन महेश की सहायता करते थे और गांव में बिजली संबंधी छोटे-मोटे कार्यों में सहयोग करते थे। गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे वे ग्राम पंचायत के पास स्थित ट्रांसफार्मर के नजदीक बिजली के खंभे पर काम कर रहे थे।
जोरदार बिजली का झटका
इसी दौरान उनका दाहिना हाथ ऊपर से गुजर रही 11 केवी (किलोवोल्ट) लाइन के संपर्क में आ गया, जिससे उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक के पुत्र बूरे दत्तु ने बताया कि उस समय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बंद थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए मदनूर सरकारी अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
बिजली का करंट लगने पर क्या करना चाहिए?
सबसे पहले बिजली का स्रोत बंद करना चाहिए और पीड़ित व्यक्ति को सीधे हाथ से छूने से बचना चाहिए। लकड़ी या सूखी वस्तु की मदद से व्यक्ति को बिजली के संपर्क से अलग किया जा सकता है। गंभीर स्थिति में तुरंत डॉक्टर या एम्बुलेंस की सहायता लेना जरूरी होता है। सांस या धड़कन रुकने पर प्राथमिक उपचार दिया जा सकता है। सुरक्षा के लिए गीले हाथों और धातु की वस्तुओं से दूरी रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
1 यूनिट बिजली कितने रुपए की है?
बिजली की दरें राज्य, उपभोक्ता श्रेणी और बिजली वितरण कंपनी के अनुसार अलग-अलग होती हैं। घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए यूनिट दर अलग निर्धारित की जाती है। कई राज्यों में स्लैब सिस्टम लागू होता है, जिसमें अधिक उपयोग पर दर बढ़ सकती है। सरकारी सब्सिडी और टैक्स के कारण भी अंतिम बिल में अंतर आता है। नवीनतम दरों की जानकारी संबंधित बिजली विभाग या वितरण कंपनी द्वारा जारी की जाती है।
इलेक्ट्रिक झटका लगने पर दिखाई देने वाला लक्षण है?
करंट लगने पर शरीर में जलन, दर्द, सुन्नपन, मांसपेशियों में खिंचाव और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई, दिल की धड़कन प्रभावित होना या शरीर पर जलने के निशान भी हो सकते हैं। लक्षण करंट की तीव्रता और संपर्क की अवधि पर निर्भर करते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी माना जाता है। समय पर उपचार से गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है।
1 किलो कोयले से कितनी बिजली बनती है?
कोयले की गुणवत्ता और बिजली संयंत्र की तकनीक के आधार पर बिजली उत्पादन की मात्रा बदलती है। सामान्य तौर पर 1 किलो कोयले से लगभग 2 से 3 यूनिट तक बिजली उत्पादन संभव माना जाता है। उच्च गुणवत्ता वाले कोयले से अधिक ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। बिजली उत्पादन में मशीनों की दक्षता और तापीय प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में अधिकांश ताप विद्युत संयंत्र कोयले पर आधारित हैं।
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