News Hindi : कृष्णा जल समझौता तेलंगाना के लिए ‘मृत्युदंड’- वेदिरे श्रीराम

Read Time:  1 min
श्रीराम
श्रीराम
FONT SIZE
GET APP

हैदराबाद। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पूर्व सलाहकार और वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार के सलाहकार वेदिरे श्रीराम (Vedire Sriram) ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrasekhar Rao) द्वारा कृष्णा नदी के 299 टीएमसी जल पर सहमति देना तेलंगाना के लिए ‘मृत्युदंड’ साबित हुआ है। केसीआर के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीराम ने नदी जल बंटवारे पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

811 टीएमसी में से केवल 299 टीएमसी जल पर सहमति

उन्होंने कहा कि एपेक्स काउंसिल की बैठक में केसीआर ने कुल 811 टीएमसी में से केवल 299 टीएमसी जल पर सहमति दी, जो तेलंगाना के साथ अन्याय है। उन्होंने सवाल उठाया कि पालमूरु–रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना की योजना के दौरान ऐसा निर्णय कैसे लिया गया। श्रीराम ने आरोप लगाया कि बीआरएस सरकार 299 टीएमसी जल का भी पूरा उपयोग नहीं कर सकी और सिंचाई केवल चुनावी बयानबाजी तक सीमित रही। उन्होंने केंद्र द्वारा नए ट्रिब्यूनल के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि मजबूत कानूनी रणनीति से तेलंगाना को 650 टीएमसी से अधिक जल मिल सकता है।

कृष्णा जल विवाद क्या है?

जल के बंटवारे को लेकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच चला आ रहा अंतरराज्यीय विवाद ही कृष्णा जल विवाद कहलाता है। नदी के पानी के उपयोग, परियोजनाओं और हिस्सेदारी को लेकर यह विवाद दशकों से बना हुआ है।

कृष्णा जल बंटवारा विवाद क्या है?

पानी को राज्यों में कैसे और कितनी मात्रा में बाँटा जाए, इसी को लेकर यह विवाद उत्पन्न हुआ। समाधान के लिए केंद्र सरकार ने कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण गठित किया, लेकिन नए राज्यों के गठन के बाद विवाद फिर से उभर गया।

तीस्ता जल समझौता कब हुआ था?

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल समझौता अब तक अंतिम रूप से नहीं हो पाया है। इसका मसौदा वर्ष 2011 में तैयार किया गया था, लेकिन कुछ राज्यों की असहमति के कारण यह समझौता अभी तक लागू नहीं हो सका है।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।