कोर्ट ने माना आरोपों को गंभीर
नासिक: नासिक की एक अदालत ने शनिवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में हुए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में मुख्य आरोपी निदा खान को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। निदा की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार किया। सरकारी वकील अजय मिसर ने अदालत में तर्क दिया कि निदा पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और मामले की तह तक जाने के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना अनिवार्य है। निदा खान फिलहाल फरार हैं और पुलिस(Police) उनकी तलाश कर रही है।
प्रेग्नेंसी की दलील नहीं आई काम
सुनवाई के दौरान निदा खान की ओर से अपनी प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से बचने की गुहार लगाई गई थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता और जांच की आवश्यकता को देखते हुए इस मानवीय आधार पर राहत देना उचित नहीं समझा। FIR के मुताबिक, निदा पर आरोप है कि उन्होंने महिला कर्मचारियों पर बुर्का पहनने के लिए दबाव बनाया और उन्हें धार्मिक रूप से प्रताड़ित किया। नासिक पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले के विभिन्न पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहा है।
अन्य पढ़े: रांची के 7 साल के इशांक का वर्ल्ड रिकॉर्ड
जांच का दायरा और गिरफ्तारियां
इस हाई-प्रोफाइल मामले में SIT अब तक कुल 9 FIR दर्ज कर चुकी है, जो मुख्य रूप से महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव से जुड़ी हैं। पुलिस ने अब तक एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों की पुलिस कस्टडी भी 5 मई तक के लिए बढ़ा दी है। दूसरी ओर, TCS ने स्पष्ट किया है कि वह कार्यस्थल पर किसी भी तरह के उत्पीड़न के खिलाफ ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है और जांच में पूरा सहयोग कर रही है।
कोर्ट ने निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका को क्यों खारिज कर दिया?
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस दलील के आधार पर याचिका खारिज की कि निदा पर लगे आरोप गंभीर हैं और मामले की गहन जांच के लिए उनसे हिरासत (Custody) में पूछताछ करना जरूरी है।
निदा खान पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए गए हैं?
निदा खान पर महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न के साथ-साथ उन्हें बुर्का पहनने के लिए मजबूर करने और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप है।
अन्य पढ़े: