हैदराबाद। एई फाउंडेशन ने अंतर्रारष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के अवसर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘स्वाभिमान परियोजना’ केंद्र की शुरुआत की। इस केंद्र का उद्घाटन फलकनुमा के आरएनबी कॉलोनी स्थित बंजारा कल्याण सामुदायिक भवन में किया गया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस कार्यक्रम के तहत हैदराबाद के नेशन इंस्टीट्यूट आफ फौशन डिजाइनिंग (एनआईएफएस) के विद्यार्थी स्थानीय महिलाओं को उन्नत सिलाई और दर्जी कार्य की तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे। केंद्र में सिलाई मशीनें भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें समाजसेवियों (social workers) और सहयोगियों व्यवसायी गोपाल चौधरी और अजय कुमार शुक्ल द्वारा दान किया गया है।

स्थानीय महिलाओं की उपस्थिति के साथ कार्यक्रम का समापन
यह केंद्र महिलाओं के लिए कौशल विकास और आजीविका के अवसर प्रदान करने वाला स्थायी प्रशिक्षण स्थल बनेगा। कार्यक्रम में संगीता मिश्रा (संस्थापक निदेशक, संस्था), बंडलगुड़ा राजस्व विभाग के प्रवीण और मोहन, फलकनुमा पुलिस निरीक्षक जंगैया, अपराध निरीक्षक जाकिर हुसैन तथा उपनिरीक्षक राजेश्वर रेड्डी सहित कई अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। नायक नगर कॉलोनी समिति के नेता शंकर नायक, कृष्णा नायक, श्रीनु नायक, दिनेश और अन्य सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए। बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं की उपस्थिति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संस्था ने भविष्य में ‘स्वाभिमान परियोजना’ के अंतर्गत और भी केंद्र स्थापित कर अधिक से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
स्वाभिमान आंदोलन की स्थापना किसने की?
आंदोलन की स्थापना ई. वी. रामासामी पेरियार ने की थी। इस आंदोलन की शुरुआत 1925 में तमिलनाडु में हुई थी। इसका उद्देश्य समाज में समानता स्थापित करना, जाति भेदभाव का विरोध करना और लोगों में आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करना था। इस आंदोलन ने सामाजिक सुधार, शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और दक्षिण भारत में सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया।
स्वाभिमान का क्या अर्थ है?
अर्थ है अपने प्रति सम्मान और आत्मगौरव की भावना रखना। जब व्यक्ति अपने अधिकारों, मूल्यों और व्यक्तित्व का सम्मान करता है, तो उसे स्वाभिमान कहा जाता है। यह व्यक्ति को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। स्वाभिमान का मतलब घमंड नहीं बल्कि अपनी गरिमा और सम्मान की रक्षा करना है, जिससे व्यक्ति समाज में ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।
स्वाभिमान के तीन प्रकार कौन से हैं?
सामान्य रूप से तीन प्रमुख प्रकारों में समझा जा सकता है। पहला व्यक्तिगत स्वाभिमान, जिसमें व्यक्ति अपने आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को महत्व देता है। दूसरा सामाजिक स्वाभिमान, जिसमें व्यक्ति समाज में अपने सम्मान और पहचान की रक्षा करता है। तीसरा राष्ट्रीय स्वाभिमान, जिसमें देश और उसकी संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना शामिल होती है। ये तीनों प्रकार व्यक्ति और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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