स्थानीय नेताओं के साथ रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाईं
हैदराबाद। हुस्नाबाद स्थित एलम्मा चेरुवु पर आयोजित काइट फेस्टिवल (Kite Festival) में राज्य के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाईं और संक्रांति पर्व की खुशियों में सहभागिता की। मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने इस मौके पर हुस्नाबाद की जनता को भोगी और मकर संक्रांति (Makar Sankranti) की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संक्रांति का पर्व परिवार के सदस्यों के साथ, रंगीन रंगोली और गोब्बेम्माओं के बीच पारंपरिक ढंग से मनाया जाना चाहिए। मंत्री ने बताया कि कल हैदराबाद के परेड ग्राउंड में काइट एंड स्वीट फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें 40 देशों ने भाग लिया और सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय काइट प्लेयर्स उपस्थित रहे।
सभी क्षेत्रों में तेजी से किया जा रहा है विकास
उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में 1200 प्रकार की मिठाइयों और व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए थे, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष के भीतर एलम्मा चेरुवु को पूर्ण रूप से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगली संक्रांति पर हुस्नाबाद में काइट एंड स्वीट फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि हुस्नाबाद क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और शिक्षा के सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महासमुद्रम गंडी, सरदार पापन्ना गुट्टालु, भैरव स्वामी मंदिर, अर्बन पार्क, रायिकल वाटर फॉल्स, एलम्मा चेरुवु, एलम्मा मंदिर, पोतलपल्ली राजराजेश्वर स्वामी मंदिर, कोथकोंडा श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर और गौरवेल्ली गंडीपल्ली परियोजना जैसे स्थलों के विकास से हुस्नाबाद एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा। अंत में मंत्री ने लोगों से अपील की कि संक्रांति पर्व को परिवार के साथ उल्लासपूर्वक, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाएं।
मकर संक्रांति उत्सव क्यों मनाया जाता है?
यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण यात्रा शुरू होती है, जिसे शुभ माना गया है। किसान वर्ग के लिए यह फसल कटाई का समय होता है, इसलिए आभार, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक बन गया है।
मकर संक्रांति के पीछे की कहानी क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं, जिससे संबंधों में मधुरता का संदेश मिलता है। साथ ही महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण में देह त्याग किया था, इसलिए इस काल को मोक्षदायक माना गया है।
मकर संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए?
परंपरा अनुसार तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र और अन्न का दान शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है, साथ ही जरूरतमंदों को सहायता मिलती है।
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