हैदराबाद । डाक विभाग (Department of Posts), तेलंगाना परिमंडल ने जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में दो विशेष डाक कवर जारी किए। जनजातीय गौरव दिवस हर साल 15 नवंबर को, पूज्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हस्ती भगवान बिरसा मुंडा (Bhagwan Birsa Munda) की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और भारत सरकार द्वारा घोषित 5वें जनजातीय गौरव दिवस के समारोह के समापन का प्रतीक है।
डाक सेवा बोर्ड की सदस्य मनीषा सिन्हा भी उपस्थित रही
विशेष आवरण विमोचन समारोह शांति सभागार, डाक सदन, अबिड्स, हैदराबाद में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य जतोथु हुसैन, भारतीय डाक सेवा की डाक सेवा बोर्ड की सदस्य (वित्तीय सेवाएँ) सुश्री मनीषा सिन्हा, तेलंगाना परिमंडल की मुख्य पोस्टमास्टर जनरल डॉ. वीणा कुमारी डर्मल सहित भारतीय डाक के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और जनजातीय समुदाय उपस्थित थे। जनजातीय समुदायों में नृत्य सामूहिक पहचान, भक्ति और सामाजिक उत्सव की अभिव्यक्ति है। तेलंगाना कई जीवंत जनजातीय नृत्य शैलियों का घर है जो इसके स्वदेशी समुदायों के मूल्यों, रीति-रिवाजों और कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाते हैं।
लम्बाडा/बंजारा नृत्य जनजातीय नृत्यों को दर्शाया गया
विशेष आवरण में प्रमुख जनजातीय नृत्यों जैसे लम्बाडा/बंजारा नृत्य, गुस्साडी (गोंड), आतापटस (कोया), कलापथ (अंध), चेंचू नृत्य और कोलाटम (कोंडारेड्डी) को दर्शाया गया है। ये नृत्य दपड़ा, नंगारा, रबाब, पेपरी और ढोल जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर प्रस्तुत किए जाते हैं, जो आदिवासी संस्कृति की लयबद्ध सुंदरता और विविधता को दर्शाते हैं। जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीसीआरएंडटीआई), हैदराबाद ने शोध और दृश्य-श्रव्य अभिलेखागार के माध्यम से इन परंपराओं का दस्तावेजीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डाक विशेष आवरण तेलंगाना की इन जीवंत सांस्कृतिक धरोहरों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। आदिलाबाद, मंचेरियल, आसिफाबाद, निर्मल और अन्य जिलों में फैले तेलंगाना के आदिवासी समुदायों के पास लकड़ी, बांस, लौकी, मिट्टी और जानवरों की खाल से बने देशी वाद्य यंत्रों के माध्यम से व्यक्त एक समृद्ध संगीत परंपरा है।
जनजातीय गौरव दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह भारत के आदिवासी नायकों, उनके संघर्ष, बलिदान और देश की आज़ादी व संस्कृति में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।
15 नवंबर को किसकी जयंती को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है?
15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है।
वे एक महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और जननायक थे।
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