मंत्रियों ने दिए तेजी से पूरा करने के निर्देश
हैदराबाद। तेलंगाना सरकार के मंत्रियों ने मेडाराम सम्मक्का-सरलम्मा मंदिर (Sammakka-Saralamma Temple) में चल रहे अंतिम चरण के विकास और पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। राजस्व, आवास, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने अधिकारियों और ठेकेदारों से कहा कि मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं के लिए भव्य और सुव्यवस्थित स्थल के रूप में विकसित किया जाए। इस मौके पर पंचायती राज मंत्री दानासरी अनसूया सीतक्का, विधायक तेल्लम वेंकट राव, पायम वेंकटेश्वरलु, कोरम कनकैय्या और जारे आदिनारायण (Adinarayan) भी उपस्थित रहे।
मंदिर में दर्शन कर की विशेष पूजा-अर्चना
सभी नेताओं ने मंदिर में दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद हरिता होटल में आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टर दिवाकर टी.एस. ने विकास कार्यों की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने निर्देश दिया कि मास्टर प्लान के तहत स्वीकृत सभी मुख्य द्वार (आर्च) और अन्य लंबित कार्यों को निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। वहीं मंत्री सीतक्का ने कहा कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाए, ताकि उन्हें बेहतर अनुभव मिल सके। अंत में मंत्रियों ने नरलापुर गांव में अवुला लक्ष्मी और राजू के लिए बनाए गए इंदिरम्मा आवास का उद्घाटन भी किया।
मेडाराम मंदिर का इतिहास क्या है?
तेलंगाना के जंगलों में स्थित मेडाराम स्थान पर समक्का-सरलम्मा देवी की पूजा की जाती है। यह मंदिर किसी पारंपरिक संरचना की तरह नहीं है, बल्कि जनजातीय आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसका इतिहास लगभग 800 साल पुराना माना जाता है, जब आदिवासी वीरांगनाओं समक्का और सरलम्मा ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया था। उनके सम्मान में यहां हर दो साल में भव्य जत्रा आयोजित होती है।
मेडाराम मंदिर की कहानी क्या है?
कहानी के अनुसार समक्का और उनकी बेटी सरलम्मा ने स्थानीय लोगों की रक्षा के लिए शासकों के खिलाफ युद्ध किया। उन्होंने अत्याचार और कर वसूली का विरोध किया। युद्ध में वीरगति प्राप्त करने के बाद उन्हें देवी के रूप में पूजा जाने लगा। समक्का-सरलम्मा जत्रा आज एशिया के सबसे बड़े जनजातीय त्योहारों में से एक है, जहां लाखों श्रद्धालु आते हैं।
मेडाराम वीआईपी दर्शन टिकट की कीमत कितनी है?
इस स्थान पर आमतौर पर किसी प्रकार का नियमित वीआईपी दर्शन टिकट सिस्टम नहीं होता, क्योंकि यह पारंपरिक मंदिर की तरह नहीं है। समक्का-सरलम्मा जत्रा के दौरान भी दर्शन सामान्य रूप से ही होते हैं। हालांकि भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन विशेष व्यवस्थाएं करता है, लेकिन सामान्यतः अलग से टिकट लेकर वीआईपी दर्शन की व्यवस्था नहीं होती।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :