Old City roads : पुराने शहर में बारिश के कारण सड़क निर्माण कार्य ठप

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निवासियों को उठानी पड़ रही परेशानी

हैदराबाद: लगातार बारिश के कारण पुराने शहर में सड़क (Road) निर्माण कार्य रुक गया है, जिससे कई इलाकों के निवासियों को भारी असुविधा हो रही है। आगामी गणेश उत्सव (Ganesh festival) से पहले कई इलाकों में ठेकेदारों ने पुनर्निर्माण के लिए सड़कें खोदी थीं लेकिन पिछले एक पखवाड़े से लगातार हो रही बारिश के कारण काम अधूरा रह गया, जिससे निवासियों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। जंगममेट निवासी एम. प्रमोद रेड्डी ने बताया कि मुख्य सड़क तक जाने वाले तीन अलग-अलग हिस्सों को ठेकेदारों ने सड़क निर्माण के लिए खोद दिया है। प्रमोद रेड्डी ने कहा, ‘करीब एक महीना हो गया है, और बारिश का हवाला देकर सड़कें नहीं बनाई गई हैं। निवासियों को इलाके से मुख्य सड़क तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

महीनों पहले पाइपलाइन बिछाने के काम के लिए खोदी गई थी सड़क

वट्टेपल्ली फलकनुमा स्थित अल्मास होटल की ओर जाने वाली सड़क का एक बड़ा हिस्सा महीनों पहले पाइपलाइन बिछाने के काम के लिए खोदा गया था। गुंटल बाबा दरगा निवासी सैयद हाजी ने शिकायत करते हुए कहा, ‘काम लगभग एक महीने पहले पूरा हो गया था, फिर भी अधिकारियों ने इसकी मरम्मत की ज़हमत नहीं उठाई। इस वजह से खोदे गए हिस्से पर पानी जमा हो जाता है, जिससे यह मच्छरों के पनपने का अड्डा बन जाता है।’ फतेह दरवाजा जंक्शन पर, दूध बाउली की ओर जाने वाली सड़क को पुनर्निर्माण के लिए तोड़ दिया गया था।

एक पखवाड़े से ज्यादा समय से शुरू नहीं किया काम

हालाँकि, जीएचएमसी ने बारिश का हवाला देते हुए एक पखवाड़े से ज़्यादा समय से काम शुरू नहीं किया है। फतेह दरवाजा निवासी मिराज खान ने सवाल किया, ‘जब अधिकारियों को पता है कि बारिश का मौसम है, तो वे ठेकेदारों को इस समय काम शुरू करने की अनुमति क्यों देते हैं?’ इसी तरह की शिकायतें कई अन्य इलाकों से भी आई हैं, जहां ठेकेदारों ने पुनर्निर्माण के लिए सड़कें खोद दीं, लेकिन बारिश का कारण बताकर काम पूरा करने में देरी कर दी।

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वर्षा की उत्पत्ति कैसे हुई?

प्राकृतिक चक्र के अनुसार सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदियों और झीलों का जल वाष्प बनकर ऊपर उठता है। यह वाष्प ठंडी हवाओं के संपर्क में आकर संघनित होकर बादल बनाती है। बादलों में भारीपन बढ़ने पर जल की बूंदें धरती पर गिरती हैं, जिसे वर्षा की उत्पत्ति कहा जाता है।

बारिश का असली नाम क्या है?

संस्कृत में बारिश का असली नाम “वृष्टि” या “वर्षा” माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रों में इसका उल्लेख इसी नाम से मिलता है। स्थानीय भाषाओं में इसके लिए अलग-अलग शब्द प्रयोग होते हैं, परंतु संस्कृत शब्द “वृष्टि” सबसे प्राचीन और मूल नाम माना जाता है।

बारिश कैसे होती है और क्यों होती है?

जल चक्र की प्रक्रिया में सूर्य की गर्मी से जल वाष्प में बदलकर ऊपर उठता है। वाष्प ठंडी हवा में जाकर संघनित होकर बादल बनाता है। बादलों का भार बढ़ने पर वे जल की बूंदों को छोड़ते हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जल संतुलन बनाए रखने और जीवन के लिए आवश्यक है।

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लेखक परिचय

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