गजवेल हत्या मामले में दो सुरक्षा गार्ड आरोपी
हैदराबाद। तेलंगाना पीएसएआरए नियंत्रण अधिकारी (Telangana PSARA Control Officer) ने राज्य की प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। सिद्धिपेट कमिश्नरेट (Siddipet Commissionerate) क्षेत्र के गजवेल पुलिस स्टेशन में दर्ज हत्या मामले में रंजीत पांडे उर्फ रंजीत राय और रितेश कुमार राय उर्फ रितेश राय नामक दो सुरक्षा गार्ड आरोपी हैं। जांच में पता चला कि ये दोनों संपदा इंडस्ट्रियल सुरक्षा एजेंसी, कुतुबुल्लापुर, मेडचल–मल्काजगिरी में कार्यरत थे, लेकिन एजेंसी के पास वैध पीएसएआरए लाइसेंस नहीं था। इसके चलते एजेंसी के मालिक के खिलाफ एफआईआर नंबर 1994/2025, सेक्शन 223 बीएनएस और पीएसएआरए अधिनियम–2005 की सेक्शन 20–22 के तहत मामला दर्ज किया गया।
नियमों का उल्लंघन करने पर मालिक को अधिकतम एक वर्ष जेल
नियंत्रण अधिकारी ने चेतावनी दी कि राज्य में कई अन्य प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियां भी पीएसएआरए लाइसेंस के बिना गार्ड और सुपरवाइजर नियुक्त कर रही हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर मालिक को अधिकतम एक वर्ष जेल या 25,000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। नियंत्रण अधिकारी ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिए कि पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति करें। आधार/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/राशन कार्ड जैसी पहचान विवरण एकत्र करें। इसके अलावा 18 से 65 वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों को ही नियुक्त की जानी चाहिए।
सजा प्राप्त अपराधियों को गार्ड नियुक्त न करें
दो साल या अधिक जेल सजा प्राप्त अपराधियों को गार्ड नियुक्त न करें। पीएसएआरए अधिनियम के अनुसार निर्धारित प्रशिक्षण अनिवार्य है। अतिरिक्त डीजीपी (इंटेलिजेंस), तेलंगाना, हैदराबाद(पीएसएआरए अधिनियम–2005 के तहत तेलंगाना राज्य नियंत्रण अधिकारी)ने कहा है कि अनियंत्रित एजेंसियों को तुरंत लाइसेंस प्राप्त करने और नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। नियम तोड़ने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
लाइसेंस में कितना खर्चा आता है?
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने पर आने वाला खर्च अलग-अलग चरणों पर निर्भर करता है। सामान्य रूप से लर्नर लाइसेंस के लिए लगभग 200 रुपये और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए करीब 300 रुपये सरकारी शुल्क लिया जाता है। यदि स्मार्ट कार्ड या अतिरिक्त सेवाएं शामिल हों तो खर्च थोड़ा बढ़ सकता है। ड्राइविंग टेस्ट, मेडिकल प्रमाणपत्र और फोटो जैसी औपचारिकताओं में भी कुछ अतिरिक्त राशि लग सकती है। कुल मिलाकर सामान्य व्यक्ति को 500 से 1000 रुपये के बीच खर्च आ सकता है, बशर्ते प्रक्रिया सीधे सरकारी तरीके से पूरी की जाए।
लाइसेंस को हिंदी में क्या कहते हैं?
हिंदी भाषा में लाइसेंस को सामान्यतः “अनुज्ञापत्र” कहा जाता है। इसका अर्थ किसी व्यक्ति को किसी विशेष कार्य को करने की सरकारी अनुमति देना होता है। ड्राइविंग लाइसेंस के संदर्भ में यह वाहन चलाने की वैध स्वीकृति को दर्शाता है। सरकारी दस्तावेजों, कानूनी भाषा और प्रशासनिक कार्यों में अनुज्ञापत्र शब्द का प्रयोग किया जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे लाइसेंस ही कहते हैं, लेकिन शुद्ध हिंदी में यही इसका सही शब्द माना जाता है।
यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस कैसे बनाएं?
उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहले लर्नर लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके लिए आयु प्रमाण, पता प्रमाण और फोटो के साथ आवेदन किया जाता है। निर्धारित समय बाद ड्राइविंग टेस्ट देना होता है, जिसमें वाहन चलाने की योग्यता जांची जाती है। टेस्ट पास करने पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाता है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन और आरटीओ कार्यालय में सत्यापन के माध्यम से पूरी होती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और समय की बचत होती है।
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