Tirumala : आईसीसीसी से सुगम और तेज दर्शन व्यवस्था

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तिरुमला। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) ने श्रद्धालुओं को तेज और सुविधाजनक दर्शन उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक तकनीक और निरंतर डिजिटल निगरानी प्रणाली का प्रभावी उपयोग शुरू किया है। भीड़ प्रबंधन के लिए स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) तिरुमला का प्रमुख नियंत्रण केंद्र बन गया है, जहां से अधिकारियों द्वारा श्रद्धालुओं की आवाजाही की रीयल टाइम निगरानी (Real-time Monitoring) की जा रही है और भीड़ नियंत्रण के त्वरित निर्णय लिए जा रहे हैं। तिरुमला में लगाए गए सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से वैकुंठम कतार परिसर, नारायणगिरि शेड्स, अन्नप्रसाद केंद्र, पार्किंग क्षेत्र, मंदिर परिसर और प्रमुख सड़कों की लगातार निगरानी की जा रही है।

भीड़ प्रबंधन में तकनीक की अहम भूमिका

अधिकारियों द्वारा भीड़ घनत्व और कतार प्रवाह पर नजर रखी जा रही है ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे। टीटीडी अधिकारियों के अनुसार भीड़ को किसी एक स्थान पर अधिक देर तक रोकने से बचाने के लिए समन्वित उपाय किए जा रहे हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी की जा रही है ताकि कतार व्यवस्था संतुलित बनी रहे। कतार में प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, दूध, अन्नप्रसाद और चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेष ध्यान नारायणगिरि शेड्स और वैकुंठम कतार परिसरों पर दिया जा रहा है, जहां भीड़ को डिजिटल निगरानी के माध्यम से नियंत्रित कर बैचों में आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि दर्शन प्रक्रिया निर्बाध रहे।

75,000 श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था

अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक आधारित भीड़ प्रबंधन प्रणाली के कारण गर्मी की छुट्टियों के दौरान भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु बनी हुई है। पहले वर्षों की तुलना में अब श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतारों में प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ रही है और दर्शन प्रक्रिया अधिक तेज एवं सरल हुई है। टीटीडी के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देश पर आईसीसीसी चौबीसों घंटे कार्यरत है ताकि भीड़ प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जा सके।

वर्तमान में टीटीडी सप्ताहांत में 85,000 से अधिक श्रद्धालुओं और सामान्य दिनों में लगभग 75,000 श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था कर रहा है। इस वर्ष 2 मई को रिकॉर्ड 91,005 श्रद्धालुओं ने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। आंकड़ों के अनुसार 2026 में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1 मई से 12 मई के बीच 9,27,420 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि 2025 में इसी अवधि में यह संख्या 8,10,942 और 2024 में 8,49,881 थी।

तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में लगभग 85 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख और अन्य समुदायों के लोग भी यहां निवास करते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जाती है। बोनालू, बथुकम्मा और दशहरा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मंदिरों और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?

चावल यहां का प्रमुख भोजन माना जाता है और इसे दाल, सांभर तथा विभिन्न सब्जियों के साथ खाया जाता है। मसालेदार स्वाद वाले व्यंजन इस क्षेत्र की खास पहचान हैं। हैदराबादी बिरयानी दुनियाभर में प्रसिद्ध मानी जाती है। इसके अलावा सरवा पिंडी, जोन्ना रोट्टे, सकिनालु और पचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन भी काफी लोकप्रिय हैं। लाल मिर्च, इमली और देसी मसालों का उपयोग भोजन को विशेष स्वाद देता है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पारंपरिक खानपान की मजबूत पहचान देखने को मिलती है।

तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?

ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र को “त्रिलिंग देश” कहा जाता था। माना जाता है कि यह नाम तीन प्रमुख शिव मंदिरों — कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम — से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यही शब्द बदलकर वर्तमान नाम बना। दक्षिण भारत की संस्कृति, भाषा और परंपराओं में इस क्षेत्र की अलग पहचान रही है। वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर इसे नया राज्य बनाया गया। आईटी उद्योग, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक उत्सवों के कारण यह देश के महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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