Crime : ड्रंक एंड ड्राइव पर सख्ती, दो दिन में 474 लोगों पर मामले दर्ज

Read Time:  1 min
ड्रंक एंड ड्राइव
ड्रंक एंड ड्राइव
FONT SIZE
GET APP

हैदराबाद। हैदराबाद यातायात पुलिस ने सड़क सुरक्षा (road safety) को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शहरभर में चलाए गए विशेष ड्रंक एंड ड्राइव अभियान के दौरान 474 वाहन चालकों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। यह जानकारी संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) डी. जॉयल डेविस ने दी। पुलिस द्वारा 15 और 16 मई को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान शराब (Liquor) पीकर वाहन चलाते हुए पकड़े गए लोगों में 417 दोपहिया वाहन चालक, 24 तिपहिया वाहन चालक तथा 33 कार और अन्य चारपहिया वाहन चालक शामिल हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, ब्रीथ एनालाइज़र जांच में 30 से 50 बीएसी स्तर वाले 103 मामले, 51 से 100 बीएसी वाले 188 मामले तथा 101 से 150 बीएसी वाले 100 मामले दर्ज किए गए।

अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

इसके अलावा 151 से 200 बीएसी स्तर पर 44, 201 से 250 बीएसी पर 19, 251 से 300 बीएसी पर 8 तथा 300 से अधिक बीएसी स्तर वाले 12 चालक पकड़े गए। संयुक्त पुलिस आयुक्त डी. जॉयल डेविस ने कहा कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे। साथ ही वाहन चालकों और शहरवासियों से यातायात नियमों का पालन करने तथा ट्रैफिक पुलिस को सहयोग देने की अपील की।

ड्रिंक एंड ड्राइव केस में क्या होता है?

शराब पीकर वाहन चलाने पर पुलिस चालक का ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट करती है। तय सीमा से अधिक अल्कोहल मिलने पर मामला दर्ज किया जाता है। वाहन जब्त किया जा सकता है और चालक को कोर्ट में पेश होना पड़ता है। पहली बार गलती करने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या जेल की सजा भी हो सकती है। बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है। सड़क सुरक्षा के लिए यातायात पुलिस नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाती रहती है।

ड्रिंक एंड ड्राइव केस में क्या होगा?

शराब के प्रभाव में वाहन चलाते पकड़े जाने पर पुलिस कानूनी कार्रवाई शुरू करती है। चालक का मेडिकल या ब्रेथ टेस्ट किया जाता है और रिपोर्ट के आधार पर चालान बनाया जाता है। कई मामलों में वाहन अस्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है। अदालत में पेशी के बाद जुर्माना, लाइसेंस सस्पेंड या जेल की सजा तय हो सकती है। दुर्घटना होने की स्थिति में मामला और गंभीर बन जाता है। भविष्य में बीमा दावों और ड्राइविंग रिकॉर्ड पर भी इसका असर पड़ सकता है।

धारा 185 कब लागू होती है?

मोटर वाहन अधिनियम की यह व्यवस्था तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है। यदि शरीर में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो पुलिस इस धारा के तहत मामला दर्ज करती है। इसके अंतर्गत जुर्माना, कारावास या दोनों सजा दी जा सकती हैं। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस कानून का सख्ती से पालन कराया जाता है।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।